आपको लगता हैं कभी
इस देश में कुछ बदलेगा!!
नेता कहते हैं सारा
दोष जनता का हैं जीडीपी, रुपया उनकी वजह से
गिर रहा हैं और जनता सारा दोष नेताओ पर थोपती हैं| मतलब साफ हैं की कुछ भी हो हम दोषी नहीं हैं अपना दोष इस देश में बस
दुसरो पर थोपने की लोगो को आदत हो गयी हैं| यहाँ तक हमें ईमानदार अधिकारी तक पसंद नहीं आते हमें रिश्वतखोर अफसर पसंद
आते हैं क्योकि हम वहाँ कुछ ले देकर अपना काम जो करा लेते हैं|
यह तक नहीं मालूम
लोगो को देशभक्ति कैसे दिखाई जाती हैं अधिकतर लोग तो सिर्फ सीमा पर दुश्मन देश से
लड़ने को ही देशभक्ति मानते हैं, थोडा और आगे बढ़ गए
तो फेसबुक और ट्वीटर पर भारत जिंदाबाद के नारे लगा लिए और खा पीकर सो गए की हम हो
गए बड़े वाले देशभक्त मतलब साफ़ हैं हमें
पता ही नहीं की देशभक्ति कैसे की जाती हैं| लिवाइस की जींस और कोक पेप्सी लेज के चिप्स खाते हुए हम देश की गिरती हुई
अर्थव्यवस्था पर चर्चा करते हैं और अगर कोई स्वदेशी सामान प्रयोग करने की सलाह दे
तो उसका मनोबल यह कहकर तोड़ने की कोशिस करते हैं की पहले फेसबुक की
प्रोफाइल बंद कर लैपटॉप फोड़ दे मोबाइल तोड़ दे यह तो हमारी सोच हैं, नहाने
के लिए लक्स चाहिए खाने के लिए विदेशी पापड़ जो 10 रूपये का आलू खरीदकर 500 रुपये
में बेचा जाता हैं और चिंता करेंगे जीडीपी की कौन सा दोहरा चरित्र हैं यह अपने देश
के नागरिको का कि हम जीरो तकनिकी से बनी चीजे भी विदेशी खरीदना चाहते हैं|
आखिर हम कब
बदलेंगे, कब हम जापान के नागरिको की तरह प्रण लेंगे की जो चीज हमारे देश में बनती
हैं वह चीज हम कभी विदेशी नहीं खरींदेगे, द्वतीय विश्वयुद्ध में तबाह जापान को
किसी नेता नहीं बनाया, बनाया तो उस देश के नागरिको ने बनाया आज जापानी हम
हिन्दुस्तानियों को विकास के हर क्षेत्र में पीछे कोसो पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ रहे
हैं, पर हम तो नहीं सुधरेंगे क्योकि हम बेशर्म लोग जो ठहरे, बेशर्मी हमारी
राष्ट्रीय पहचान और चरित्र जो बन गयी हैं, हमने सिर्फ आरोप लगाना सिखा हैं करना तो
कुछ सिखा ही नहीं ना, कोल्डड्रिंक में अगर जहर हैं तो भाई आपको क्या दिक्कत पी तो
हम रहे हैं ना||
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