खाने में बिना मीन-मेख निकाले चुपचाप प्लेट साफ करके खाते हुए मेरे घर वाले देखते हैं तो बड़े आश्चर्यचकित होकर कहते हैं "तू तो पूरा बदल गयी हैं अब तो खाने में बिलकुल नखरे नहीं करती और ना ही कोई ड्रेस अब खरीदती हैं, कोई बात हैं क्या,सब ठीक तो हैं ना?"
अब मैं उनको क्या जवाब दूँ जब मार्केट सब्जी खरीदने जाती हूँ तो 15 से रूपये किलो आलू की भिन्डी, 100 रूपये के ऊपर का मस्टर्ड आयल/ रिफाइंड आयल और 45 का विष्णु भोग चावल १३० का आशीर्वाद आटा, और थोडा सा सामान खरीदने में 1000 रूपये की नोट खर्च करती हूँ तो मुझे बड़ी शिद्दत से अपने ऑफिस का ऑफिस बॉय याद आता हैं और सोचती हूँ कि कैसे वह 3000 रुपये में अपना घर चलाता होगा|
इस महँगाई में कैसे मुमकिन होता होगा की दो बच्चे और पति पत्नी का खर्च चलाना, कैसे वह बच्चो को पढ़ा पाता होगा सच में मन वितृष्णा से भर उठता हैं अब आप ही बताइए ऐसे में कैसे मैं खाने से शिकायत करू कैसे जूठन छोड़ दूँ प्लेट में|
और उतना ही गुस्सा सिस्टम और सरकार पर आता हैं जो 34 रुपये काफी मानते हैं एक दिन का खर्च, तो कुछ नेता 1 रुपये से लेकर 12 रुपये तक में भरपेट खाना मिलने का दावा करते हैं बहुत गुस्सा आता हैं जब एक ही समाज में इतना अंतर देखती हूँ तो, और यही एक वजह हैं कि हर भष्ट्र नेता से घृणा होती हैं मुझे उनका किरदार गंध मारता हुआ प्रतीत होता हैं और मन में गुस्से के साथ विद्रूपता उत्पन्न होती हैं, यही वजह हैं की राजनीति में मुझे रूचि हैं और मैं हर अच्छे और इमानदार नेता को इस देश की गद्दी पर देखना चाहती हूँ ताकि समाज की यह विद्रूपता ख़त्म हो|
अब मैं उनको क्या जवाब दूँ जब मार्केट सब्जी खरीदने जाती हूँ तो 15 से रूपये किलो आलू की भिन्डी, 100 रूपये के ऊपर का मस्टर्ड आयल/ रिफाइंड आयल और 45 का विष्णु भोग चावल १३० का आशीर्वाद आटा, और थोडा सा सामान खरीदने में 1000 रूपये की नोट खर्च करती हूँ तो मुझे बड़ी शिद्दत से अपने ऑफिस का ऑफिस बॉय याद आता हैं और सोचती हूँ कि कैसे वह 3000 रुपये में अपना घर चलाता होगा|
इस महँगाई में कैसे मुमकिन होता होगा की दो बच्चे और पति पत्नी का खर्च चलाना, कैसे वह बच्चो को पढ़ा पाता होगा सच में मन वितृष्णा से भर उठता हैं अब आप ही बताइए ऐसे में कैसे मैं खाने से शिकायत करू कैसे जूठन छोड़ दूँ प्लेट में|
और उतना ही गुस्सा सिस्टम और सरकार पर आता हैं जो 34 रुपये काफी मानते हैं एक दिन का खर्च, तो कुछ नेता 1 रुपये से लेकर 12 रुपये तक में भरपेट खाना मिलने का दावा करते हैं बहुत गुस्सा आता हैं जब एक ही समाज में इतना अंतर देखती हूँ तो, और यही एक वजह हैं कि हर भष्ट्र नेता से घृणा होती हैं मुझे उनका किरदार गंध मारता हुआ प्रतीत होता हैं और मन में गुस्से के साथ विद्रूपता उत्पन्न होती हैं, यही वजह हैं की राजनीति में मुझे रूचि हैं और मैं हर अच्छे और इमानदार नेता को इस देश की गद्दी पर देखना चाहती हूँ ताकि समाज की यह विद्रूपता ख़त्म हो|
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