सच कहा रजा मुराद जी, टोपी पहनने से धर्म नहीं बदलता और बहुत से हिन्दू टोपी पहनते भी है।
पर क्या कभी आप अपने लोगो को यह भी सलाह देंगे कि तिलक लगाने से, वन्देमातरम बोलने से,मंदिर का प्रसाद खाने से, या रामलीला में आरती की थाली भर पकड लेने से भी किसी का धर्म नहीं बदल जाता।
और इस तरह की ओछी और छिछोरी हरकते किसी आम आदमी ने नहीं, माने हुए गणमान्य लोगो के द्वारा की गयी है, जनप्रतिनिधियो द्वारा की गयी है जिससे देश का बहुसंख्यक वर्ग बहुत व्यथित है।
कभी उनकी भावनाओ का भी तो ख्याल करिए। ये वही लोग मुराद साहब जिन्होंने शको, हूणों और मंगोलों जो हमारे देश में आक्रमणकारी बन कर आये थे उनको भी अपने में, अपने संस्कारो में ऐसा प्रेम से मिलाया जैसे दूध में पानी मिल जाता हो। आज मुराद साहब आप मुझे इन भारतीयों में से एक भी शक, हूण या मंगोल खोज कर नहीं दिखा सकते। यह हमारे भाईचारे और विशाल ह्रदय का ही सबूत है, पुरे विश्व में हम जहाँ कहीं भी गए शांति और भाईचारे का सन्देश ही देने गए कही मारकाट कर लोगो की सभ्यता या संस्कृति नहीं बदली बल्कि उन लोगो को शांति और प्रेम का ऐसा सन्देश दिया की आज भी वो ज्ञान के प्रकाश के लिए भारत के आभारी है श्रीलंका, चीन, जापान म्यामार जैसे देश उदाहरण है।
आप भी हमारे साथ प्रेम से पेश आइये, एक कदम शांति और भाईचारे का बढाइये हम आपको दौड़ कर गले लगा लेंगे। दीपावली में हमारे साथ मिलकर अंधरे को दूर करने के लिए दिया जलाइये, होली में अबीर गुलाल के साथ मन का मैल धोइये हम ईद में सेवइयो के मीठेपन से कड़वाहट दूर करेंगे। याद रखियेगा मुराद साहब भाईचारा कभी एकतरफा नहीं होता और जो एकतरफा हो तो समझ लीजियेगा की कोई गोद में बैठकर गला काटने की तैयारी में लगा हैं।
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कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है पर...
कल रात बाइक स्टंट करने वाले की मौत से कोई अफ़सोस नहीं है वे थे ही गोली मार देने लायक, कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है पर...
दिल्ली पुलिस उस दिन कहाँ थी जिस दिन पाँच हजार सफ़ेद जालीदार टोपी वाले शबे बारात पर बाइक्स से निकल कर लडकियों और महिलाओ के साथ छेड़खानी कर रहे थे? उस दिन पुलिसवालों ने गोली क्यों नहीं चलायी क्यों उनके सामने अपनी नाक रगडती दिख रही थी? क्या वे बाइक राईडर सिर्फ इसलिए मार गिराए गए की वो हिन्दू थे उनकी जान की कोई कीमत नहीं हैं। आखिर एक देश में दो अलग अलग कानून और तरीका क्यों लोगो पर अजमाया जा रहा हैं?
इसी तरह गुजरात पुलिस जो वेलनोन आतंकियों को मारकर गिराती है तो इसके लिए नरेन्द्र मोदी को दोषी बनाया जाता है,आतंकियों को मारने वाले पुलिस वालो को जेल भेजा जाता है जबकि देश की गुप्तचर एजेंसिया इशरत जहां और उसके साथियो को आतंकी करार देती है, उसके लिए तमाम मानवाधिकार वाले छाती पीटकर विलाप करते है क्या वो इसके लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री शिला दिक्षित को दोषी ठहराएंगे। सिर्फ बाइक स्टंट करने वाले लडको को जिन पर पुलिस आरोप लगा रही हैं की उन्होंने पुलिस पर पत्थर फेके जबकि दिल्ली की उस सड़क पर कही पत्थर नहीं था सिर्फ पुलिस की गाडी के पास ही दो चार पत्थर दिख रहे थे उसके लिए दिल्ली पुलिस के लोगो को जेल भेजा जाएगा।
अगर एक बार यह मान भी लिया जाए की लडको ने पुलिस पर पत्थर फेके तो क्या पत्थर का जवाब गोली होता है?
क्या आज बटाला हाउस इनकाउन्टर पर घडियाली आँसू बहाने वाले चिरकुट सेकुलर नेता इन लडको की मौत पर आँसू बहाते हुए इनके लिए इन्साफ की मांग करेंगे?
और हाँ चिरकुट सेकुलर हिन्दुओ तुम तो बस यही सोचना की यह घटना तुम्हारे साथ या तुम्हारे बच्चो के साथ नही होगी बंद कर लो अपनी आँखे इस घटना से बिलकुल उस बगुले की तरह जो सामने बिल्ली देखकर अपनी आँखे यह सोचकर बंद कर लेता है कि खतरा अब टल गया।
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