सुशासन बाबू नीतीश राज का हाल, बिहार के छपरा जिले में मिड डे मील की खिचड़ी खाकर मरे 9 बच्चे!!
अब चिरकुट सेकुलर कह रहे है की इसमें नितीश बाबु की क्या गलती? बोधगया में बम फटा तो इसमें नितीश बाबू की क्या गलती?
आज सबसे ज्यादा बिहारी मजदुर अपना घर परिवार छोड़कर दुसरे राज्यों में "मजदूरी" करने को बाध्य है तो इसमें नितीश बाबु की क्या गलती?
सच तो ये है, हे चिरकुट सेकुलरो गलती तो उन गरीब बच्चो की है जो खिचड़ी खाकर मरे, गलती तो उनकी है जो आतंकवादी घटनाओ में मारे जाते है, गलती तो उन "मजदूरो" की है जो बाहर के राज्यों में काम करते है और राज ठाकरे जैसे टुच्चे नेताओ के क्षेत्रवाद का शिकार होते है।
मेरा मन युही नहीं विद्रोह पर उतारू होता हैं चिरकुट सेकुलरो यही तुम्हारी डबल स्टैण्डर्ड बाते मुझे विद्रोह करने पर मजबूर करती है, गुजरात में आतंकवादियों का इनकाउंटर हो तो मोदी दोषी मक्खी भी मरे तो भी मोदी दोषी पर यहाँ कुछ भी हो जाए तो ये दोषी नहीं!!
बात ख़राब जरुर लगेगी पर क्या मुझे कोई बतायेगा की गुजराती मजदुर शब्दों पर गौर करियेगा मजदुर बोला है क्यों बाहर के राज्यों में काम नहीं कर रहे? क्यों हर राज्य में सिर्फ बिहारी या यूपी के मजदुर काम कर रहे हैं क्या इन राज्यों में मजदूरी जैसा अनस्किल्ड रोजगार भी उपलब्ध नहीं है?
माना आपकी बात की हर भारतीय को पुरे देश में कही भी जाकर काम करने की आजादी है पर क्या यह उचित है की बहुत ज्यादा संख्या में पहुँच कर वहाँ के लोगो का हक़ मारा जाए!!
इन दोनों प्रदेशो के मुख्यमंत्री क्या ये बताएँगे की जैसे इन राज्यों के मजदुर दुसरे राज्यों में जाकर काम कर रहे है वैसे ही इन्होने उन राज्यों के कितने मजदूरो को अपने राज्य में रोजगार दिया हुआ है?
और जब ये नेता अपने राज्य में मजदूरी जैसा काम भी ना उपलब्ध करा सके तो ये किस बात के नेता और कैसा इनका सुशासन।
सेकुलिज्म का अचार खिलाने या खाने से काम नहीं चलने वाला यह जायज सवाल अब इनसे पूछा जाना चाहिए और वोट अब इनराज्यों में रोजगार के ही मुद्दे पर पड़ना चाहिए।
अब चिरकुट सेकुलर कह रहे है की इसमें नितीश बाबु की क्या गलती? बोधगया में बम फटा तो इसमें नितीश बाबू की क्या गलती?
आज सबसे ज्यादा बिहारी मजदुर अपना घर परिवार छोड़कर दुसरे राज्यों में "मजदूरी" करने को बाध्य है तो इसमें नितीश बाबु की क्या गलती?
सच तो ये है, हे चिरकुट सेकुलरो गलती तो उन गरीब बच्चो की है जो खिचड़ी खाकर मरे, गलती तो उनकी है जो आतंकवादी घटनाओ में मारे जाते है, गलती तो उन "मजदूरो" की है जो बाहर के राज्यों में काम करते है और राज ठाकरे जैसे टुच्चे नेताओ के क्षेत्रवाद का शिकार होते है।
मेरा मन युही नहीं विद्रोह पर उतारू होता हैं चिरकुट सेकुलरो यही तुम्हारी डबल स्टैण्डर्ड बाते मुझे विद्रोह करने पर मजबूर करती है, गुजरात में आतंकवादियों का इनकाउंटर हो तो मोदी दोषी मक्खी भी मरे तो भी मोदी दोषी पर यहाँ कुछ भी हो जाए तो ये दोषी नहीं!!
बात ख़राब जरुर लगेगी पर क्या मुझे कोई बतायेगा की गुजराती मजदुर शब्दों पर गौर करियेगा मजदुर बोला है क्यों बाहर के राज्यों में काम नहीं कर रहे? क्यों हर राज्य में सिर्फ बिहारी या यूपी के मजदुर काम कर रहे हैं क्या इन राज्यों में मजदूरी जैसा अनस्किल्ड रोजगार भी उपलब्ध नहीं है?
माना आपकी बात की हर भारतीय को पुरे देश में कही भी जाकर काम करने की आजादी है पर क्या यह उचित है की बहुत ज्यादा संख्या में पहुँच कर वहाँ के लोगो का हक़ मारा जाए!!
इन दोनों प्रदेशो के मुख्यमंत्री क्या ये बताएँगे की जैसे इन राज्यों के मजदुर दुसरे राज्यों में जाकर काम कर रहे है वैसे ही इन्होने उन राज्यों के कितने मजदूरो को अपने राज्य में रोजगार दिया हुआ है?
और जब ये नेता अपने राज्य में मजदूरी जैसा काम भी ना उपलब्ध करा सके तो ये किस बात के नेता और कैसा इनका सुशासन।
सेकुलिज्म का अचार खिलाने या खाने से काम नहीं चलने वाला यह जायज सवाल अब इनसे पूछा जाना चाहिए और वोट अब इनराज्यों में रोजगार के ही मुद्दे पर पड़ना चाहिए।
Twitter
Facebook
WEB