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एक बार जरुर सोचिये की हम देश के लिए क्या कर रहे हैं?

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हम दिन भर सरकार और नेताओ को उसको कार्यो के लिए कोसते रहते हैं मगर उन सब बातो में एक महत्तवपूर्ण बात हम ये भूल जाते हैं की हम भी इस देश के नागरिक हैं और एक नागरिक के तौर पर हमारी भी कुछ जिम्मेदारिया देश के प्रति बनती हैं, यह बात याद रखने योग्य है की किसी राष्ट्र की असफलता में जितना दोष उसके नेताओ का होता हैं उतना ही दोष उसके नागरिको का भी होता हैं|

अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार जरुर सोचिये की हम देश के लिए क्या कर रहे हैं?

किसी भी देश के विकास के लिए सबसे जरुरी बात ये होती हैं की देश का पैसा देश में रहे इससे रोजगार और देश की अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत होती हैं मगर हम विदेशी सामानों के पीछे इस तरह से पागल हैं की पूछिये मत मानती हूँ की बहुत सी चीजे हमारे देश में नहीं मिलती हैं पर जीरो तकनिकी से बनी चीजे भी हम विदेशी ही खरीदते हैं आखिर हम क्यों ऐसा करते हैं? पापड़ आचार कोल्डड्रिंक कपडे जूते परफ्यूम जैसे सामान हम देशी भी तो खरीद सकते हैं|

जापान और चाइना दोनों देश आज से 70 साल पहले हमसे भी ज्यादा बर्बाद थे पर उन्होंने तय किया की हम विदेशी सामान नहीं खरीदेंगे जनता ने अपनी इच्छाशक्ति दिखाई और आज देखिये वो कितना आगे हैं क्या हम इतने गए गुजरे हैं की हम उनसे कुछ सीख भी नहीं सकते हैं|

मित्रो हम सरकार को सही टाइम पर कर देने में भी आनाकानी करते हैं, मगर सरकार के द्वारा चलाई जा रही हर सुविधा को बेजा इस्तेमाल जरुर करना चाहते हैं, ट्रेन में जायेंगे तो वहां से कुछ सरकारी सामान चुरा लेंगे नहीं चुरा पाए तो तोड़फोड़ देंगे कचरा कहीं भी फेक देंगे, खाने नहीं खा पायेंगे तो उसको फेक देंगे, क्या इसमें भी सरकार का ही दोष हैं क्या सरकार हमको अब जीने का सलीका भी सिखाएगी? अगर हम संसाधनों का बेजा इस्तेमाल करते हैं तो यकीन मानिए हम किसी गरीब का हक़ मार रहे हैं|

और सबसे बड़ी उभरती हुई परेशानी बढती हुई जनसँख्या जिससे लगातार संसाधन कम पड़ते जा रहे हैं क्या इसके लिए भी हम सरकार को दोष दे एक एक आदमी के 10-10 बच्चे पूछने पर ऊपर वाले की देन हैं अरे इसमें ऊपर वाले का क्या लेना देना एक बच्चे कोपालने की औकात नहीं बना पाते हम और 10 बच्चे पैदा कर देते हैं उनको शिक्षा रोजगार और भोजन जब हम नहीं उपलब्ध करवा पाते तो दोषी सरकार को बना देते हैं अब बेचारी सरकार का इसमें क्या दोष?

मित्रो मैं यह नहीं कहती कि अपना पूरा जीवन आप देश के लिए समर्पित कर दो पर हम जितना अपने स्तर से देश के लिए कर सकते हैं उतना जरुर देश के लिए करे क्योकि देश बनता हैं वहाँ की जनता से और असफल भी जनता से ही होता हैं आइये हम सब मिलकर देश के लिए प्रण करे की हम अपने स्तर से हमेशा देश का सहयोग करेंगे |

और उम्मीद हैं की देश बदल देंगे!!

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इस देश में खुद कोई नहीं बदलना चाहता सब सिर्फ ये चाहते हैं की दुसरे बदले, जनता सोचती हैं कि नेता गलत हैं इसलिए नेता बदले और नेता सोचते हैं की जनता गलत हैं और सारी कुव्यवस्था जनता की वजह से फैली हैं|

उसी तरह इस देश के सारे पुरुष चाहते हैं की महिलाए बदले और भारतीय संस्कृति की मिसाल बने, मगर खुद बदल कर भारतीय संस्कृति की कोई मिसाल नहीं पेश करना चाहते हैं| सारे लोग सोचते हैं लडकिया जींस पेंट क्यों पहनती हैं पर खुद जींस पेंट पहने का उन्हें क़ानूनी हक़ हैं| खुद का कैरेक्टर कितना भी ढीला हो पर लड़की से उम्मीद करते हैं की वो सती सावित्री बन कर रहे|

खुद दुनिया भर की लडकियों से इश्क लड़ाएँगे और हर बार बोलेंगे की ये मेरा सच्चा वाला प्यार हैं पर अपनी बहन का एक भी सच्चा प्यार बर्दाश्त नहीं कर पाते| खुद नौकरीपेशा रहेंगे तो सोचते हैं की घर का हर काम औरत करे पर औरत नौकरीपेशा रहे तो भी यही उम्मीद करते हैं| दिन भर संस्कृति की वकालत करते देखे जायेंगे और साथ में लडकियों सोशल साइट्स जिस पर लडकिया महिलाए सभी हैं उस पर गन्दी गन्दी गालिया देते मिल जायेंगे| 

यह हैं चरित्र हमारे देश का नागरिको का, और उम्मीद हैं की देश बदल देंगे!!