कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है पर...

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कल रात बाइक स्टंट करने वाले की मौत से कोई अफ़सोस नहीं है वे थे ही गोली मार देने लायक, कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है पर... दिल्ली पुलिस उस दिन कहाँ थी जिस दिन पाँच हजार सफ़ेद जालीदार टोपी वाले शबे बारात पर बाइक्स से निकल कर लडकियों और महिलाओ के साथ छेड़खानी कर रहे थे? उस दिन पुलिसवालों ने गोली क्यों नहीं चलायी क्यों उनके सामने अपनी नाक रगडती दिख रही थी? क्या वे बाइक राईडर सिर्फ इसलिए मार गिराए गए की वो हिन्दू थे उनकी जान की कोई कीमत नहीं हैं। आखिर एक देश में दो अलग अलग कानून और तरीका क्यों लोगो पर अजमाया जा रहा हैं? इसी तरह गुजरात पुलिस जो वेलनोन आतंकियों को मारकर गिराती है तो इसके लिए नरेन्द्र मोदी को दोषी बनाया जाता है,आतंकियों को मारने वाले पुलिस वालो को जेल भेजा जाता है जबकि देश की गुप्तचर एजेंसिया इशरत जहां और उसके साथियो को आतंकी करार देती है, उसके लिए तमाम मानवाधिकार वाले छाती पीटकर विलाप करते है क्या वो इसके लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री शिला दिक्षित को दोषी ठहराएंगे। सिर्फ बाइक स्टंट करने वाले लडको को जिन पर पुलिस आरोप लगा रही हैं की उन्होंने पुलिस पर पत्थर फेके जबकि दिल्ली की उस सड़क पर कही पत्थर नहीं था सिर्फ पुलिस की गाडी के पास ही दो चार पत्थर दिख रहे थे उसके लिए दिल्ली पुलिस के लोगो को जेल भेजा जाएगा। अगर एक बार यह मान भी लिया जाए की लडको ने पुलिस पर पत्थर फेके तो क्या पत्थर का जवाब गोली होता है? क्या आज बटाला हाउस इनकाउन्टर पर घडियाली आँसू बहाने वाले चिरकुट सेकुलर नेता इन लडको की मौत पर आँसू बहाते हुए इनके लिए इन्साफ की मांग करेंगे? और हाँ चिरकुट सेकुलर हिन्दुओ तुम तो बस यही सोचना की यह घटना तुम्हारे साथ या तुम्हारे बच्चो के साथ नही होगी बंद कर लो अपनी आँखे इस घटना से बिलकुल उस बगुले की तरह जो सामने बिल्ली देखकर अपनी आँखे यह सोचकर बंद कर लेता है कि खतरा अब टल गया।

आजादी के बाद देश में करीब 900 जातीय या सामुदायिक नरसंहार हुये हैं

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1984 के सिख दंगों को भी नाम नरसंहार का ही दिया गया था और 2002 के गुजरात दंगों को भी नरसंहार ही कहा गया. 1984 के नरसंहार में मारे गये लोगों की संख्या 8000 से ज्यादा थी और गुजरात नरसंहार में मारे गये लोगों की तादाद 2 हजार से ज्यादा. 1984 में देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कहा था कि जब कोई बड़ा वृक्ष गिरता है तो जमीन हिलती ही है और गोधरा कांड के बाद संघ ने खुले तौर पर गुजरात नरसंहार को क्रिया की प्रतिक्रिया करार दिया था. लेकिन 1984 में कभी किसी सांसद ने राजीव गांधी को वीजा ना दिये जाने का सवाल नहीं उठाया और राजीव गांधी ने जो पहली विदेशी यात्रा की वह अमेरिका की ही थी. अमेरिका में उस वक्त राजीव गांधी से कोई सवाल सिख दंगों को लेकर नहीं पूछा गया. तो क्या उस वक्त देश के कानून और जांच एजेंसी पर सांसदों को भरोसा था या फिर तब केन्द्र में भी कांग्रेस की दो तिहाई बहुमत पाई सरकार थी और राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे. नरसंहार को लेकर सांसद कितने संवेदनशील होते हैं और कैसे नरसंहार के कंधे पर सवार होकर सत्ता पाई जाती है, यह त्रिपुरा के निली में हुये 1983 के उस नरसंहार से भी समझा जा सकता है जिसमें दो हजार से ज्यादा मुस्लिमों को मार दिया गया था या फिर मेरठ के हाशिमपुरा में 42 लोगों को पीएसी ने ही गोली मार कर नदी में बहा दिया था. बावजूद इसके दोनों ही मामले आज भी अदालत की चौखट पर ही अटके हुये हैं और इस दौर में सत्ता के सबसे मजबूत दावेदार आरोपी ही रहे और इन आरोपियों ने कई बार अमेरिकी यात्रा की और इन नरसंहारों की अहमियत देश के सांसदों के लिये इतनी ही है कि संसद के भीतर आज भी गाहे-बगाहे प्रश्‍नकाल में ऐसे दर्जनों नरसंहार पर न्याय का सवाल उठाकर या कहें चिल्ला कर कहते हुये सांसद खामोश हो जाते हैं. वैसे आजादी के बाद देश में करीब 900 जातीय या सामुदायिक नरसंहार हुये हैं और संयोग से सभी नरसंहार राजनीतिक मुनाफे घाटे में ही गुम भी हो गये. लेकिन कभी संसद के भीतर यह सवाल नहीं उठा की नरसंहार के आरोपियों को फैसला आने तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही दूर रखा जाये. उल्टे फैसले आये नहीं और आरोपी संसद तक पहुंच गये. तो क्या संसदीय राजनीति में अंधायुग होने की वजह से ही नरेन्द्र मोदी निशाने पर हैं और अंधायुग है इसलिये दिल्ली में मोदी को अमेरिका का वीजा ना देने का हंगामा मचा है! दूसरी ओर अमेरिका ने कहा कि यदि नरेद्र मोदी वीजा के लिए आवेदन करते हैं तो वह विचार जरूर करेंगे।

Source : dainik jagran

65 भारतीय सांसदों और जयचंद, मीरजाफर और मान सिंह

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हमारी नयी पीढ़ी को अकसर बड़ा अफ़सोस होता हैं की उन्होंने जयचंद, मीरजाफर और मान सिंह जैसे उस दौर के गद्दारों को नहीं देखा जिनकी वजह से भारत निर्णायक जीत हासिल करते करते अचानक हार जाया करता था और मुट्ठीभर सैनिक के साथ आये आक्रमणकारी भारत को हजारो साल गुलाम बनाये रखने में सफल हो जाया करते थे।

आश्चर्य होता हैं ना मुट्ठी भर सैनिक के साथ लोगो ने भारत पर इतने वर्षो तक कैसे राज किया खैर ज्यादा आश्चर्यचकित होने की जरुरत नहीं हैं उसकी शुरुआत हो चुकी हैं 65 भारतीय सांसदों ने ओबामा को इसलिए पत्र लिखा की अमेरिका नरेन्द्र मोदी को वीजा ना दे, बड़ी बात नहीं होगी जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री बन जायेंगे तो यही लोग अमेरिका को भारत पर हमला करने के लिए और इस कार्य में हरसंभव सहयोग करने का वादा करते हुए भी पत्र लिखे। यानी की भारत का इतिहास एक बार फिर अपने आप को दोहरा रहा हैं, इस बार हम और आप इसके साक्षी होंगे और हमारी पीढ़ी का वह पुराना अफ़सोस भी ख़त्म होगा की हमने जयचंद और मीरजाफर को नहीं देखा अब हमारे सामने पुरे 65 मीरजाफर और जयचंद हैं शौक से इनका दीदार करिए।

हिंदी, हिन्दू, स्वदेशी

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सच तो ये हैं की इस देश में आप हिंदी, हिन्दू, स्वदेशी, और राष्ट्रभक्ति की बात नहीं कर सकते हैं अगर आप करते हुए पाए जाते हैं तो आप साम्प्रदायिक, दक्षिणपंथी, अतिपिछडे और पागल घोषित किये जा सकते हैं।

हाँ सेकुरिल्ज्म के नाम पर टोपी पहनकर इफ्तारी दावत खाते हुए आप अल्पसंख्यक समुदाय के आरक्षण, अंग्रेजी भाषा का महिमामंडन, मुंबई में बार बालाओं का डांस, लिवाइस की कमर से निचे की तरफ खिसकती जिन्स, हाथ में लेज़ के चिप्स के साथ पेप्सी गटकते हुए आतंकवादियों के मानवाधिकार की बात करते हैं तो आप सही मायने में प्रगतिशील और धर्म निरपेक्ष कहलाये जायेंगे।

और हाँ भूल कर भी अपने देश की तुलना चाइना जापान जिन्होंने लगभग हमारे देश के साथ विकास की दौड़ आरम्भ की थी चर्चा नहीं कर सकते क्योकि पुरे देश में जब "गुजरात का विकास माडल" नहीं लागू किया जा सकता तो चीन और जापान का कैसे लागू किया जा सकता हैं।

नोट- अगर किसी की भावनाए आहत होती हैं तो होती रहे वैसे भावनाए कुछ हमारी भी कम आहत नहीं हैं, अपने ही देश में बेगाने होने का दंश जो हम झेल रहे हैं शायद ही उस दर्द से बड़ा कोई दर्द हो।

सुशासन बाबू नीतीश राज का हाल, बिहार के छपरा जिले में मिड डे मील की खिचड़ी खाकर मरे 9 बच्चे!!

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सुशासन बाबू नीतीश राज का हाल, बिहार के छपरा जिले में मिड डे मील की खिचड़ी खाकर मरे 9 बच्चे!!

अब चिरकुट सेकुलर कह रहे है की इसमें नितीश बाबु की क्या गलती? बोधगया में बम फटा तो इसमें नितीश बाबू की क्या गलती?
आज सबसे ज्यादा बिहारी मजदुर अपना घर परिवार छोड़कर दुसरे राज्यों में "मजदूरी" करने को बाध्य है तो इसमें नितीश बाबु की क्या गलती?

सच तो ये है, हे चिरकुट सेकुलरो गलती तो उन गरीब बच्चो की है जो खिचड़ी खाकर मरे, गलती तो उनकी है जो आतंकवादी घटनाओ में मारे जाते है, गलती तो उन "मजदूरो" की है जो बाहर के राज्यों में काम करते है और राज ठाकरे जैसे टुच्चे नेताओ के क्षेत्रवाद का शिकार होते है।

मेरा मन युही नहीं विद्रोह पर उतारू होता हैं चिरकुट सेकुलरो यही तुम्हारी डबल स्टैण्डर्ड बाते मुझे विद्रोह करने पर मजबूर करती है, गुजरात में आतंकवादियों का इनकाउंटर हो तो मोदी दोषी मक्खी भी मरे तो भी मोदी दोषी पर यहाँ कुछ भी हो जाए तो ये दोषी नहीं!!

बात ख़राब जरुर लगेगी पर क्या मुझे कोई बतायेगा की गुजराती मजदुर शब्दों पर गौर करियेगा मजदुर बोला है क्यों बाहर के राज्यों में काम नहीं कर रहे? क्यों हर राज्य में सिर्फ बिहारी या यूपी के मजदुर काम कर रहे हैं क्या इन राज्यों में मजदूरी जैसा अनस्किल्ड रोजगार भी उपलब्ध नहीं है? 

माना आपकी बात की हर भारतीय को पुरे देश में कही भी जाकर काम करने की आजादी है पर क्या यह उचित है की बहुत ज्यादा संख्या में पहुँच कर वहाँ के लोगो का हक़ मारा जाए!!

इन दोनों प्रदेशो के मुख्यमंत्री क्या ये बताएँगे की जैसे इन राज्यों के मजदुर दुसरे राज्यों में जाकर काम कर रहे है वैसे ही इन्होने उन राज्यों के कितने मजदूरो को अपने राज्य में रोजगार दिया हुआ है? 

और जब ये नेता अपने राज्य में मजदूरी जैसा काम भी ना उपलब्ध करा सके तो ये किस बात के नेता और कैसा इनका सुशासन।

सेकुलिज्म का अचार खिलाने या खाने से काम नहीं चलने वाला यह जायज सवाल अब इनसे पूछा जाना चाहिए और वोट अब इनराज्यों में रोजगार के ही मुद्दे पर पड़ना चाहिए।

तुष्टिकरण

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बढ़ता हुआ तुष्टिकरण और लगातार होती उपेक्षा मन में विद्रोह पैदा करती हैं, अगर मैं अपने बीते हुए सिर्फ दो वर्षो या अभी बीते हुए सिर्फ दो महीनो का रिव्यू करती हूँ तो मैं अपने विचारो को बिलकुल बदला हुआ पाती स्थिति ये आ गयी है की गुस्सा जो पहले करप्शन और सिस्टम से था आज हिन्दुओ की बढती हुई उपेक्षा से हो गया है। अब शायद एक बार मैं करप्शन को स्वीकार भी कर लूँ की यह लगभग हर देश के सिस्टम में हैं पर अपनी उपेक्षा स्वीकार ही नहीं होती। 

आखिर इस देश के लिए हमने क्या नहीं किया आजादी हासिल करने के लिए सबसे ज्यादा बेटे हमने कुर्बान किये, उस आजादी को बरक़रार रखने के लिए अपने भाइयो का खून पानी की तरह हमने बहाए, जिन माथो पर हम तिलक लगा कर अपने भाइयो की लम्बी आयु की प्रार्थना करते थे उनके धडो से उन मस्तको को ही हमने गायब पाया, आजादी के बाद जब देश के पास पैसा नहीं था तो राजपूत राजाओ ने अपने खजाने तक खोल दिए, पर हम आज उसी देश में उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं।

अपने ही देश में दो कानून बनाकर हमारे साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है यहाँ तक की शहीदों को सम्मान देने में भी दो आँख की जा रही हैं कुंडा डीएसपी की मौत पर पचास लाख और पांच नौकरी वही इलाहाबाद में डीएसपी द्रिवेदी की हत्या पर सिर्फ पांच लाख रुपये, बटाला हाउस में मारे गए आतंकवादियों का सम्मान और उनसे बहादुरी से लड़ते हुए मारे गए हुतात्मा मोहन शर्मा का अपमान आखिर हम कैसे बर्दास्त करे?

उनकी गरीब लडकियों को उच्च शिक्षा के लिए वजीफा और हमें ठेंगा आखिर क्यों ये सौतेला व्यवहार हमारे साथ हो रहा हैं?

मन में गुस्सा भरता जा रहा हैं, यह उपेक्षा बर्दास्त के बाहर होती जा रही हैं, उनकी भयानक गलतियों को भी शरारत समझा जा रहा है और हमसे सयंम की उम्मीद लगायी जा रही है, नहीं हैं हम कम्यूनल पर हमें कम्युनल बनने के लिए मजबूर किया जा रहा हैं और मैं भी लगातार खुद को बदलती हुई महसूस किये जा रही हूँ।

आखिर प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी ही क्यों जरुरी है ?

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आखिर प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी ही क्यों जरुरी है ?

ये सवाल बहुत से लोगो के मन में उठता होगा, मगर क्या आप इसका सही उत्तर जानते है? नहीं जानते हैं तो सुनिए आज देश के हालत बहुत बुरे है, भ्रष्ट्राचार बढ़ रहा हैं मार्केट क्रैश हो चुकी रुपये का मुल्य लगातार निचे जा रहा हैं, जीडीपी अपने निम्नतर स्तर पर हैं यानी की देश की अर्थव्यवस्था खतरे में हैं। आंतरिक सुरक्षा ब्रह्य सुरक्षा हर मसले पर हम फेल नजर आतेहैं,तुष्टिकरण की निति जोरो पर हैं, आम आदमी का जीवन कष्टप्रद हो गया हैं मगर सरकार में इन सब मोर्चो पर लड़ने की इच्छाशक्ति ही नहीं दिखती है कोई भी फैसला लेने के पहले वो अपना वोटबैंक साधती नजर आती हैं, सरक्षा में इसलिए असफल हैं की वो अपराधियों को उसके धर्म के आधार पर लाभ देती हैं जिससे अपराध घटने की बजाय बढ़ रहा हैं। 

जबकि गुजरात में अपराध सबसे कम है, आर्थिक मोर्चे पर भारत का सबसे सफल राज्य हैं बुनियादी सुविधाओ में गुजरात के अगल बगल भी कोई राज्य नहीं फटकता, मोदी का सबसे असम्भव काम ये हैं की सरकारी कर्मचारियों पर गजब का नियंत्रण, पुरे देश में सिर्फ वही एक ऐसा राज्य हैं जहां के सरकारी कर्मचारी प्राइवेट सेक्टर के कार्यशैली में काम करते हैं,जबकि और राज्यों में जिसमे भाजपा शासित राज्य भी शामिल है कर्मचारी खुद को किसी सामंत से कम नहीं समझते।

दूसरी सबसे पाजिटिव बात नरेन्द्र मोदी की जो हम युवाओ को सबसे ज्यादा आकर्षित करती हैं वह हैं उनका विजन,उनकी सोच और भारत को विकसित देश बनाने के लिए उनके प्लानिंग, सच बताइए क्या भारत का कोई नेता इतना पाजिटिव तरीके से बोलता हैं की भारत में कोई कमी नहीं है हमारे पास असीम सम्भावनाए, मुझे तो आज तक कोई नेता यह बताता नजर नहीं आया उल्टा कमियों का रोना रोता ही नजर आता हैं की यहाँ गुजरात का माडल काम नहीं करेगा, तो हमारे में और चीन जापान जैसे देशो में बहुत अंतर है मतलब कइ तमाम तरह के सिर्फ बहाने, जबकि मोदी वो रास्ते बताते नजर आते हैं जिस पर हम चलकर भारत को समृद्धि भारत बना सकते हैं।

दुसरे नेता जहां धर्म और जाति के आधार पर आरक्षण या तुष्टिकरण की बात करके समाज के बीच नफरत और घृणा का माहौल फैला रहे हैं वही मोदी सबके विकास की बात करते हैं, वो कहते हैं सबके लिए रोजगार उपलब्ध कराओ, नयी फैक्ट्रिया लगाओ जहाँ हम भारत की इस असीम युवा शक्ति को युटीलाइज करेंगे जिससे लोगो की आर्थिक स्थति भी सुधेरेगी और देश भी सशक्त आत्मनिर्भर और विकसित बनेगा आज हम दुनिया भर के देशो के लिए डपिंग ग्राउंड हैं कल सारा विश्व हमारा डपिंग ग्राउंड बनेगा लोगो के लिए इतना रोजगार होगा की आरक्षण का मुद्दा ही ख़त्म हो जाएगा।

अब आप मुझे बताइये कीहैं कोई नेता जो इतना साफ़ विकास की तस्वीर बिना किसी तुष्टिकरण के दिखाता है तो फिर मोदी क्यों नहीं??

तो आप किसके साथ हैं?

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आज नरेन्द्र मोदी के खिलाफ सिर्फ विपक्षी पार्टिया ही नहीं सारी मिडिया, अमेरिका यूरोप और सारा अरब लड़ रहा हैं, क्योकि जिन बाहरी देशो ने भारत को अपने सामान का डंपिंग ग्राउंड बना रखा हैं उन्हें इस बात का खतरा हैं की मोदी सरकार विदेशी प्रोडक्ट को भारत में हतोत्साहित करेगी जिससे इनके यहाँ आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा, भारत के मजबूत राष्ट्र बनने पर चीन के भी साम्राज्यवादी हित प्रभावित होंगे, अरब देशो के धर्मपरिवर्तन जैसे हित प्रभावित होंगे।

इसीलिए ये सारे विदेशी देश फंडिंग कर रहे है मोदी को असली लडाई अपने देश के विपक्षी पार्टियों से कम इन देशो से ज्यादा हैं क्योकि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से सबसे ज्यादा इनके हितो पर कुठाराघात होगा।

अब तय आपको करना हैं की आप देश का साथ मोदी के साथ रहकर देंगे या विदेशियों का साथ रहकर भारत लुटने में मदद करेंगे??

चिरकुट और राममंदिर

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कितनी हास्यापद बात है जो चिरकुट कभी राममंदिर बनाने के नाम पर बीजेपी को वोट नहीं दिए, वो मंदिर बनाने की तारीख पूछते है। वोट देंगे सेकुरिलिज्म के नाम पर बीजेपी के विरोध में, और मंदिर बनाने की तारीख बीजेपी से पूछेंगे।

चिरकुटो मेरी सुनो एक बार पूर्ण बहुमत दो भाजपा को अगर मंदिर ना बनाये तो ख़त्म कर देना भाजपा अगली बार, मगर वोट कांग्रेस या उसकी जैसी पार्टियों को और मंदिर बनाने की मांग बीजेपी से नहीं चलेगी।

मेरी बात

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सच पूछिये तो आज तक मोदी ने कोई ऐसा काम नहीं किया जिसका तनिक भी फायदा मुझे मिला हो क्योकि वो गुजरात के मुख्यमंत्री हैं और अभी तक उन्होंने जो भी किया हैं उसका फायदा सिर्फ गुजरातियों को ही मिला हैं, ना ही मोदी को मैंने कभी टीवी के अलावा कही देखा हैं, और शायद मैं २ साल पहले तक मोदी को जानती भी नहीं थी|

आज मैं उन सभी बिकाऊ मीडया चैनेल्स, अरब के खरीदे भाड़े के टट्टू जिनको हम मानवाधिकारवादियों के नाम से जानते हैं, और वर्णशंकर जिसकी परिभाषा अर्जुन ने श्रीमद भागवतगीता में बताई हैं की तहेदिल से आज शुक्रिया अदा करती हूँ जिनकी वजह से आज मैं मोदी को जानती हूँ, उनके काम को जानती हूँ जिसकी वजह से मैं आज मोदी की उनके वर्किंग स्टाइल की फैन हूँ|

सच बताऊ तो वो आप लोग ही हैं जिन्होंने हिन्दुओ को इस देश में कीडे मकोडे की तरह समझा, हमारे दर्द को आपने मजाक बनाया, कश्मीर में लाखो की संख्या में मारे गए हिन्दुओ के लिए झूठमुठ में भी आह तक नहीं भरी, गोधरा में जिन्दा जलाये हिन्दुओ की तपिश मुझे आज भी महसूस होती हैं मगर उनकी चीखे तो कभी आप सुनी ही नहीं, देश के हर क्षेत्र में मारे जाते हिन्दुओ पर कभी सवाल तक नहीं उठाया, धर्म के नाम पर देश में दो अलग अलग कानून बना दिए गए आपने कभी विरोध नहीं किया, देश को चलाने के लिए सबसे अधिक टैक्स हमने दिया पर हमारी मेहनत की कमाई जब किसी विशेष धर्म की यात्राओ में बांटी जाती हैं उनके लोगो की धार्मिक पढाई और पूजा कराने वालो को वेतन के रूप में बाँटा जाता हैं तो आपने हमेशा चुप्पी ही साधी, हमेशा हम लतियाए ही जाते रहे हैं अपने ही देश में मगर कभी आपने इस भेदभाव के खिलाफ आवाज नहीं उठायी|

मैं अच्छी तरह से जानती हूँ की मोदी कोई हिंदूवादी नेता नहीं हैं और ना ही वे प्रधानमंत्री बन जाने पर हिन्दुओ का कोई अलग से भला करने वाले हैं वो जो भी करेंगे उसका फायदा पुरे समाज को मिलेगा, मगर मुझे इस बात का पक्का यकीन हैं की जो भेदभाव हमारे साथ पिछले 66 सालो से होता आया हैं जो इधर के कुछ वर्षो में बढ़कर अपनी पराकाष्ठा तक लांघ गया हैं वो उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद नहीं होगा, हम भी इस देश में सम्मान के साथ बिना किसी भय के जी सकेंगे| ईसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हम सिर उठाकर चल सकेँगे। तब कोई एंडरसन, कोई क्वात्रोची हमे ठेगा ना दिखा सकेगा। कोई हमारे सैनिकोँ के सिर काटने की जुर्रत भी नहीँ करेगा, कोई हमारे मछुआरोँ को मारकर जेल जाने के बाद क्रिसमस की छुट्टियाँ और वोट डालने के बहाने मस्ती नहीँ कर पाएगा। कोई हमारी सीमा मेँ ना घुस पाएगा, कोई हमारे पूर्व राष्ट्रपति का जाँच के नाम पर अपमान भी ना कर पाएगा और यह मेरे लिए कम सुकुनदायक नहीं होगा|