Showing posts with label pakisthan. Show all posts
Showing posts with label pakisthan. Show all posts

धिक्कार है तुम्हारी कायरता पर!!

1 comments

सारे शांति दूत लग गए कहने कि जंग नहीं होनी चाहिए यह विकल्प नहीं हैं पर कोई शांति दूत यह नहीं बताना चाहता की फिर विकल्प क्या है??

आखिर कब खून से सनी हुई अपने भाइयो की लाशे हम अपने आँगन में उतरते हुए देखने को मजबूर होंगे?

कोई जवाब है इस बात का, शांतिदूतो!!

अब कहोगे की कोई तुम्हारे घर का नहीं सेना में, तुम जंग लड़ने नहीं जाओगी, बिलकुल सही कह रहे हो जिन जवानो को सीमा पर निर्दयता से "हत्या" कर दी गयी वो भी तुम्हारे कुछ नहीं लगते थे, इसलिए तुम्हे "हत्या" का अर्थ नहीं पता है। हर जवान वीरगति पाना चाहता है धोखे से हत्या होना नहीं।

और जहां तक युद्ध की बात है तो नहीं चाहते हैं हम युद्ध हम भी शांति से ही रहना चाहते है पर यह शांति सिर्फ एक हाथ में तलवार पकड़ कर ही कायम की जा सकती है। 

और जहां तक आम जनता की क़ुरबानी की बात है तो शब्दों पर गौर करना "पूरा देश युद्ध लड़ता है", जवान सीमा पर लड़ता है और अंदर हम रोज लड़ते है, युद्ध का असर देश का हर नागरिक भोगता है पर उस अपने कष्ट के लिए क्या हम इतने स्वार्थी हो जाए की रोज किसी जवान को मरते देखे!!

वाह रे शांतिदूतो(नपुन्सको) अपने बच्चो को भूख से बिलबिलाता नहीं देखसकते पर अपने गाँव में जवान के बच्चो को अनाथ होते हुए उसकी सुहागन को बेवा होते देख सकते हो!

धिक्कार है तुम्हारी कायरता पर!!