समझ में नहीं आता कि आखिर क्यों हमारे देश के नागरिको के साथ ही विदेशो में अपमानजनक व्यवहार होता हैं??
आखिर क्यों हमारे देश का सामान और दवाये(तत्कालीन मामला हिमालयन दवा कम्पनी) स्वास्थ्य मानको पर खरा ना उतर पाने की वजह से विदेश के रिजेक्ट कर दी जाती हैं?
आखिर क्यों हमारे देश में दुनिया भर का "रिजेक्टेड कूड़ा" बेचा जाता हैं ..??
आखिर क्यों हमारे देश के नागरिक विदेशो में "नस्लीय हिंसा" के शिकार होते हैं??
हैं कोई जवाब ..
हमारे देश की सरकार अपना आत्मविश्वास खो चुकी हैं, अपनी गरिमा का ख्याल नहीं हैं, आत्मविश्वास या आत्मसम्मान किसे कहते हैं यह भूल चुकी हैं..!!
आखिर हम कब तक यूँ लतियाए और अपमानित होते रहेंगे ..??
शर्म तक हम बेच कर खा गए हैं, चिढ होने लगी हैं अब खुद से ...
बस मुझे इसीलिए मोदी चाहिए की वो आये दिल्ली की गद्दी पर और यह बेशर्मी, लतखोरी दूर करके लोगो को यह बताये आत्मसम्मान क्या चीज होती हैं, देश की इज्जत किसे कहते हैं ...
और इन विदेशियो को इनकी असली औकात बताये की अगर हमने अपने बाजार तुम्हारे लिए बंद कर लिए तो तुम्हारी सारी चकाचौध अंधियारे में डूब जायेगी और हाथ में कटोरा आ जाएगा, तुम्हारे यहाँ की जनता बेरोजगार हो जायेगी सारी खुशहाली भुखमरी में बदल जायेगी ...
अब दिल्ली की गद्दी को ऐसे ही शेर की जरुरत हैं जिसकी दहाड़ सिर्फ इस्लामाबाद या बीजिंग तक ही नहीं लन्दन और वार्शिगटन तक सुनाई दे ...
तब जाकर मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफ़र का यह शेर सार्थक होगा "गाजियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की... तख़्त-ए-लन्दन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की"
आखिर क्यों हमारे देश का सामान और दवाये(तत्कालीन मामला हिमालयन दवा कम्पनी) स्वास्थ्य मानको पर खरा ना उतर पाने की वजह से विदेश के रिजेक्ट कर दी जाती हैं?
आखिर क्यों हमारे देश में दुनिया भर का "रिजेक्टेड कूड़ा" बेचा जाता हैं ..??
आखिर क्यों हमारे देश के नागरिक विदेशो में "नस्लीय हिंसा" के शिकार होते हैं??
हैं कोई जवाब ..
हमारे देश की सरकार अपना आत्मविश्वास खो चुकी हैं, अपनी गरिमा का ख्याल नहीं हैं, आत्मविश्वास या आत्मसम्मान किसे कहते हैं यह भूल चुकी हैं..!!
आखिर हम कब तक यूँ लतियाए और अपमानित होते रहेंगे ..??
शर्म तक हम बेच कर खा गए हैं, चिढ होने लगी हैं अब खुद से ...
बस मुझे इसीलिए मोदी चाहिए की वो आये दिल्ली की गद्दी पर और यह बेशर्मी, लतखोरी दूर करके लोगो को यह बताये आत्मसम्मान क्या चीज होती हैं, देश की इज्जत किसे कहते हैं ...
और इन विदेशियो को इनकी असली औकात बताये की अगर हमने अपने बाजार तुम्हारे लिए बंद कर लिए तो तुम्हारी सारी चकाचौध अंधियारे में डूब जायेगी और हाथ में कटोरा आ जाएगा, तुम्हारे यहाँ की जनता बेरोजगार हो जायेगी सारी खुशहाली भुखमरी में बदल जायेगी ...
अब दिल्ली की गद्दी को ऐसे ही शेर की जरुरत हैं जिसकी दहाड़ सिर्फ इस्लामाबाद या बीजिंग तक ही नहीं लन्दन और वार्शिगटन तक सुनाई दे ...
तब जाकर मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफ़र का यह शेर सार्थक होगा "गाजियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की... तख़्त-ए-लन्दन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की"
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