डियर फेमनिस्ट,
कृपया नारी सशक्तिकरण की सही परिभाषा मुझ अबला को बताने का कृपा कीजिये, आपकी जानकारी के लिए मैं अपने बारे में आपको बताना चाहती हूँ कि मेरे घरवालो ने मुझे "मेरी क्षमतानुसार" शिक्षा दिलवाई, खाने पहनने घूमने की मुझे उतनी ही स्वतंत्रता हैं जितना मेरे भाइयो को प्राप्त हैं। और हाँ इश्क वगैरह वाले मामले में भी पकड़े जाने पर जितनी चप्पले मेरे भाई पर तोड़ी जायेगी उतनी ही मुझ पर भी तोड़ी जायेगी। मेरा भाई भी घर से पुरे कपड़े पहनकर बाहर निकलता हैं और मुझे भी पुरे कपड़े ही पहनकर घर से बाहर निकलना पड़ता हैं, हाँ मेरे भाई को घर में पैसे लेने के लिए नाक रगड़नी पड़ती हैं पर मैं आसानी से घरवालो से पैसे ले लेती हूँ। क्या यह मेरे घरवालो का मुझ पर अत्याचार हैं? कृपया ज्ञानवर्धन करे की क्या मेरे घरवाले पुरुष सत्ता की मानसिकता वाले हैं?
मैं उत्सुक हूँ की नारी सशक्तिकरण की सही परिभाषा क्या होगी? क्या नारी की आजादी सही मायने में तभी होगी जब वो "देहमुक्ति" का आंदोलन चलाये? आपके नारी मुक्ति आंदोलनों से प्रतीत होता हैं कि आपके हिसाब से नारी तभी स्वतंत्र हैं जब वो अपने वस्त्र उतारकर प्रदर्शन करे, और अपनी मर्जी के अनुसार अनगिनत पुरुषो के साथ गमन करे! अगर आपके हिसाब से नारी का यही असली सशक्तिकरण तो हैं तन बेचने वाली वैश्या सबसे ज्यादा सशक्त होनी चाहिए। और इस बात की क्या गारन्टी हैं की इस तरह से सशक्त नारी पुरुषो के हाथ की खिलौना भर नहीं रह जायेगी।
कृपया मेरी शंकाए दूर करे।
Written by- Awantika Singh
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1 comments: (+add yours?)
आपने बिलकुल सही कहा। तथाकथित नारी सशक्तिकरण इसी अवधारणा पर टिका हुआ है कि वे देहमुक्त होकर गमन करें। भला ये कौना सा सशक्तिकरण हुआ, यह विचारणीय है। अपने इष्टतम गुणों के कारण उसका वास्तविक मान-सम्मान बढ़े तो सशक्तिकरण होगा।
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