मोदी विरोधियो के दोहरे मापदंड ...!!

जब कोई दो टके का लेखक जिसको कोई नहीं जानता वह कहता हैं कि "मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर देश छोड़ दूँगा"

या कोई अनर्थ-शास्त्री जिसने लोगो का जीवन स्तर उठाने के लिए कुछ ना किया हो सिर्फ किताबी ज्ञान से नोबल पुरस्कार पा गया हो वह लोगो को राय देते हुए फिरता हैं की "मोदी देश के प्रधानमन्त्री बनने की योग्यता नहीं रखते"

बुझी और बेरोजगार पूर्व फ़िल्मी अभिनेत्री जिनके चरित्र तक को भारत की आम जनता संदिग्ध नजरो से देखती हैं वो कहती हैं कि "मोदी की प्रधानमंत्री बनने से देश की छवि को धक्का लगेगा"

तब मोदी विरोधी खुश होकर उन्हें हीरो बनाने पर तुल जाते हैं और जगह जगह उनकी कही गयी बातो का लिंक चेपने लगते हैं ... और बोलते हैं उन्हें अपनी अभिवयक्ति की स्वतन्त्रता हैं

पर अगर कोई सेलेब्रेटी मोदी के पक्ष में बोलता हैं तो उसे ये खलनायक बनाने पर तुल जाते हैं कि उन्हें इस तरह के राजनैतिक विचार सार्वजानिक जीवन में नहीं देना चाहिए यहाँ तक की उस पर कीचड़ उछाल प्रतियोगिता सी चालु हो जाती हैं ...

आखिर ऐसा दोगलापन क्यों ??

की आप जो कहे वही सही हैं, बाकी लोग मुर्ख हैं उन्हें अपना नेता चुनने की तमीज नहीं हैं

अगर ऐसा हैं तो, अपनी घटिया सोच अपने पास रखिये हम मुट्ठी भर तमीजदार विरोधियो के बजाय उस "बदतमीज" जनसैलाब के साथ हैं जो मोदी का समर्थक हैं क्योकि आपके सेकुरिज्ल्म और वामपंथ में हम खुद को असुरक्षित, ठगा हुआ पाते हैं, और खुद को बेरोजगार पाते हैं|

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