जनरल वी के सिंह और मिडिया के विवाद में सबसे ज्यादा चिंतित करने वाला व्यवहार बीजेपी प्रवक्ताओ का रहा, बीजेपी प्रवक्ता सरकार का पक्ष रखने में हमेशा नाकाम साबित होते हैं। ना इनके पास होमवर्क होता हैं और ना ही सरकार के कार्यो की जानकारी, जिसकी वजह से न्यूज़ चैनेल के दफ्तरों में शर्मनाक समर्पण करते हुए दीखते हैं। यहाँ तक की इनमे आपसी सामजस्य की भी कमी साफ़ तौर पर दृष्ट्रिगोचर होती हैं, सम्बित पात्रा साहब जहाँ टीवी पर यह कहते नजर आते हैं कि जनरल साहब का यह निजी बयान हैं वही दूसरी बीजेपी प्रवक्ता शाजिया इल्मी के अंदर का पत्रकार जाग उठता है। और वो जनरल को गलत ठहराते पत्रकारो की अस्मिता बचाने की बात कहती नजर आती हैं। जबकि आम आदमी के प्रवक्ता पत्रकारो पर भी आक्रमक तरीके से हमला करते हैं।
प्रधानमन्त्री चुनावों के दौरान पत्रकारो की दहाड़कर न्यूज़ ट्रेडर बताया करते थे, और पत्रकार उनके सामने सहमे नजर आते थे। परन्तु आज बीजेपी प्रवक्ता इन्ही न्यूज़ ट्रेडर्स presstitutes के सामने शर्मनाक समर्पण की मुद्रा में हैं। यहाँ तक की बीजेपी का हर प्रवक्ता अलग अलग बात कर रहा हैं इनसे लाख दर्जे अच्छा संजय झा और AAP के प्रवक्ता हैं उनके नेता रंगे हाथ पकड़े जाते, करप्शन के आरोपो से पार्टी घिरी होती हैं फिर भी वो अपनी पार्टी और अपने नेताओ का जबरदस्त डिफेंड करते हैं मिडिया में और बीजेपी प्रवक्ता अपने नेताओ के घिरने पर साथ देने की कौन कहे पल्ला झाड़ लेते हैं।
जनरल साहब को मिडिया के खिलाफ जिस तरह से सोशल मिडिया पर जनसमर्थन मिला उससे भी बीजेपी प्रवक्ता हवा के रुख का अनुमान लगाने में अक्षम रहे, जबकि आम आदमी पार्टी सोशल मिडिया के रुख से यह तय करती हैं कि उन्हें टीवी पर क्या बोलना हैं? बीजेपी प्रवक्ताओ को समझना होगा "एकपक्षीय आदर्शवाद" हमेशा आत्मघाती होता हैं, इसी एकपक्षीय आदर्शवाद के चलते ये 2004 में हारे और इस रवैये के साथ आगे भी इसी तरह हारेंगे।
याद रखिये, टीवी की पहुँच घर घर में हैं जबकि सोशल
मिडिया अभी भी भारत में अधिकतर लोगो के लिए दूर की कौड़ी हैं। आप अगर टीवी पर अपने काम जनता तक नहीं बता पाये, अपने नेताओ को डिफ़ेम होने से नहीं रोक पाये तो अगला चुनाव भी आपके लिए दिल्ली साबित होगा।
और अंतिम बात, यूपी विधानसभा चुनाव में अब बेहद कम वक्त बचा हैं, दूसरी पार्टियो ने कमर कस ली हैं युद्ध में उतरने की पर बीजेपी दूर दूर तक नहीं दिख रही हैं।
विधानसभा में आपको यहाँ मोदी जी के चेहरे पर वोट नहीं मिलेगा, बीजेपी से कोई लोकप्रिय चेहरा आगे करिये और SP के खिलाफ सड़को पर जंग तेज करिये नहीं तो दिल्ली की तरह यहाँ भी कलपना पड़ सकता हैं !!
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