शहीद वीर मोहनचंद शर्मा जी को भाव भीनी श्रद्धांजलि
आज १९ सितम्बर है, आज ही के दिन दिल्ली में सीरियल विस्फोट करके निर्दोषों का खून बहाने वाले आतंकियों से संघर्ष करते हुए दिल्ली के बटला हाउस में इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था .दिल्ली पुलिस के रणबांकुरे इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा जितने जांबाज थे उतने ही जिंदादिल भी। उनकी जांबाजी के कारण उन्हें सात बार वीरता पुरस्कार और राष्ट्रपति पदक भी मिला। वह मरणोपरांत अशोक चक्र से भी सम्मानित हुए। 23 सितंबर, 1965 को अल्मोड़ा में जन्मे शर्मा 26 जून, 1989 को दिल्ली पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे।
1995 में वह बारी से पहले तरक्की पाकर इंस्पेक्टर बने। वह 35 आतंकियों को मार गिराने और 80 से अधिक की गिरफ्तारी के अभियानों में शामिल रहे। उनकी टीम ने 40 से अधिक कुख्यात अपराधियों को भी ढेर किया और सौ से
ज्यादा को गिरफ्त में लिया। 19 सितंबर 2008 को बटला मुठभेड़ के दौरान शहीद इंस्पेक्टर मोहनचंद ने जिन बड़े मामलों को सुलझाया उनमें 2000 में लालकिला गोली कांड, 2001 में संसद पर हमला और 2005 में दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाके भी शामिल हैं। 2006 में मोहनचंद की टीम ने निजामुद्दीन इलाके में लश्कर के दो आतंकियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन आतंकियों की निशानदेही पर लश्कर का ऑपरेशनल चीफ मोहम्मद इकबाल उर्फ अबू हमजा को मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
सीजीओ कांप्लेक्स के पास आधा घंटे से भी ज्यादा समय तक चली उस मुठभेड़ में मोहनचंद ने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया था। चूंकि शर्मा आतंकियों के खिलाफ खासा सक्रिय रहते थे इसलिए वह आइबी के सीधे संपर्क में रहते थे। उनकी बहादुरी का स्मरण करते हुए दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त वाईएस डडवाल ने कहा, ‘इंस्पेक्टर शर्मा आतंक के खिलाफ लड़ाई में पूरे देश की शान थे। उन्होंने हमेशा आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। बटला हाउस में इंडियन मुजाहिदीन आतंकियों से लोहा लेते समय शहीद हुए मोहनचंद के रूप में देश ने एक जाबांज अफसर खोया। इसकी क्षतिपूर्ति होना संभव नहीं है।’
नम आँखों से उन्हें शत शत नमन !!!
मोहनचंद शर्मा अमर रहें
साभार - न्यूज़ वेबसाइट
आज १९ सितम्बर है, आज ही के दिन दिल्ली में सीरियल विस्फोट करके निर्दोषों का खून बहाने वाले आतंकियों से संघर्ष करते हुए दिल्ली के बटला हाउस में इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा जी ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था .दिल्ली पुलिस के रणबांकुरे इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा जितने जांबाज थे उतने ही जिंदादिल भी। उनकी जांबाजी के कारण उन्हें सात बार वीरता पुरस्कार और राष्ट्रपति पदक भी मिला। वह मरणोपरांत अशोक चक्र से भी सम्मानित हुए। 23 सितंबर, 1965 को अल्मोड़ा में जन्मे शर्मा 26 जून, 1989 को दिल्ली पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे।
1995 में वह बारी से पहले तरक्की पाकर इंस्पेक्टर बने। वह 35 आतंकियों को मार गिराने और 80 से अधिक की गिरफ्तारी के अभियानों में शामिल रहे। उनकी टीम ने 40 से अधिक कुख्यात अपराधियों को भी ढेर किया और सौ से
ज्यादा को गिरफ्त में लिया। 19 सितंबर 2008 को बटला मुठभेड़ के दौरान शहीद इंस्पेक्टर मोहनचंद ने जिन बड़े मामलों को सुलझाया उनमें 2000 में लालकिला गोली कांड, 2001 में संसद पर हमला और 2005 में दिल्ली में हुए सीरियल बम धमाके भी शामिल हैं। 2006 में मोहनचंद की टीम ने निजामुद्दीन इलाके में लश्कर के दो आतंकियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन आतंकियों की निशानदेही पर लश्कर का ऑपरेशनल चीफ मोहम्मद इकबाल उर्फ अबू हमजा को मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
सीजीओ कांप्लेक्स के पास आधा घंटे से भी ज्यादा समय तक चली उस मुठभेड़ में मोहनचंद ने आतंकियों का डटकर मुकाबला किया था। चूंकि शर्मा आतंकियों के खिलाफ खासा सक्रिय रहते थे इसलिए वह आइबी के सीधे संपर्क में रहते थे। उनकी बहादुरी का स्मरण करते हुए दिल्ली पुलिस के पूर्व आयुक्त वाईएस डडवाल ने कहा, ‘इंस्पेक्टर शर्मा आतंक के खिलाफ लड़ाई में पूरे देश की शान थे। उन्होंने हमेशा आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। बटला हाउस में इंडियन मुजाहिदीन आतंकियों से लोहा लेते समय शहीद हुए मोहनचंद के रूप में देश ने एक जाबांज अफसर खोया। इसकी क्षतिपूर्ति होना संभव नहीं है।’
नम आँखों से उन्हें शत शत नमन !!!
मोहनचंद शर्मा अमर रहें
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