सेकुलर सरकार का नकाब खीच चूका हैं

रविशंकर प्रसाद जी पूछ रहे हैं कि "गुजरात पर बोलने वाले ऑपरेशन दंगा पर खामोश क्यों हैं.."

हम भी यही पूछ रहे हैं कि आखिर ये कैसी चुप्पी हैं??

मुझे तो आज से कुछ साल पहले अनिल कपूर की आई फिल्म "नायक" की याद आ रही हैं बड़ी शिद्दत से अमरेश पूरी का जो दंगो के समय मुख्यमंत्री थे फिल्म में उनका बोला हुआ एक एक संवाद याद आ रहा हैं ...

क्या आपको भी याद आ रहा हैं .. और याद आ रहा हैं तो फिर कब तक सोने का नाटक करते रहेंगे, याद रखिये मित्रो दंगो में सिर्फ इंसान मरता हैं... मरती हैं तो सिर्फ इंसानियत, कब तक इनकी कुर्सी के लिए हम अपना घर जलाते रहेंगे ... नकाब खीच चूका हैं रंगमंच का पर्दा उठ चूका हूँ असलियत देखिये, पहचानिए की कौन गुनहगार हैं मासूमो का ....क्यों सुनी हो गयी माँ की कोख ...

अब जाग जाइए बहुत हो गया अब.... देश की तक़दीर आपके हाथ में हैं सही व्यक्ति का चुनाव करिए .. जो देश में विकास की लहर लाये, बेरोजगार के हाथ में रोजगार हो नाकि बेरोजगारी भत्ते की भीख ...

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