मैं
आपसे बात करना चाहती हूँ, अपना दर्द साझा करना चाहती हूँ, मैं सबसे पहले
अपने बारे में आपको बताना चाहती हूँ की मैं बेहद भावुक हूँ, इंसान तो बहुत
दूर की बात हैं कोई छोटी सी चींटी मर जाए तो खाना गले के नीचे नहीं उतरता।
अख़लाक़ की हत्या मुझे भी अंदर तक झिंझोड़ देती हैं, उसके परिवार की चिंता
होती हैं, महंगाई के दौर में सबसे ज्यादा चिंता आर्थिक पक्ष को लेकर होती
हैं। मानती हूँ की जो हुआ बेहद गलत हुआ ऐसा बिलकुल नहीं होना चाहिए। यह
सिस्टम से लेकर हमारी सामाजिक चेतना तक का फेलियर हैं।
लेकिन मैं आपके सामने एक दूसरा पहलु भी रखना चाहती हूँ की जो मेरे जैसे लोगो को ना चाहते हुए भी कट्टरता की तरफ धकेल रहे हैं जो हमारे स्वभाव में ही नहीं हैं। आपके रवैये से हम बेहद दुखी और असुरक्षित महसूस करते हैं और हमे मजबूरन ऐसी घटनाओ पर चुप्पी साधनी पड़ती हैं और आपको बता दूँ की यह चुप्पी हमारी पहली स्टेज हैं। दूसरी स्टेज पक्ष में बोलना और तीसरी स्टेज खुद वैसा ही हो जाना होता हैं। आपसे मार्मिक अपील करती हूँ की हमे इस कट्टरवाद के रास्ते पर चलने से बचा लीजिये यह आपका एहसान हम पर, इंसानियत और सेक्युलरिज्म पर होगा। आपके रवैये से कभी-कभी इतना कड़वापन मन में भर जाता हैं की मैं परेशान और बेचैन हो उठती हूँ।
दुःख इस बात का होता हैं की जब ऐसी घटनाओ के शिकार हिन्दू होते हैं तब आप सेकुलर लोग चुप्पी साध लेते हैं यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा हैं। मुझे याद हैं नागपुर में मोईन खान की हत्या, दादरी के अख़लाक़ की हत्या तो मैं पुरे जीवन ही नहीं भूल पाऊँगी, लेकिन मुझे सिर्फ दो दिन पहले पता चला की एक हिन्दू को सिर्फ इसलिए मार दिया गया की उसने एक धार्मिक स्थल के पास हार्न बजाया, एक लड़के को सिर्फ इसलिए मार दिया गया की वो किसी मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था। केरल से भी लगातार खबरे आती हैं नृशंस हत्याओ की तब आप लोग इसका विरोध क्यों नहीं करते? क्यों नहीं ऐसी खबरे मिडिया की कवरेज पाती हैं? बस ऐसी ही बाते मन में असुरक्षा पैदा करती हैं और आप जैसो की इंसानियत कटघरे में खड़ी करती हैं क्यों आप लोग ऐसी हत्याओ में मरने वाले का धर्म देखकर अपने आँसू बहाते हैं। क्यों नहीं आप लोग ऐसे लोगो को तब लताड़ते हैं? अरे मेरे यहाँ तो नास्तिक लोगो को भी स्वीकार किया जाता हैं, पर आप काफिर की हत्या के लिए उकसाते हैं। हम कैसे खुद को सुरक्षित महसूस करे ऐसे माहौल में?
हिन्दुओ की आस्था गाय से जुडी हैं तो प्लीज छोड़ दीजिये ना, मांस खाने के लिए बहुत से पशु पक्षी हैं खाइये कौन रोक रहा हैं, अपने हिन्दू भाइयो के लिए छोड़ दीजिये।
हम तो आपके लिए अपने गणपति के पंडाल खाली कर देते हैं कि आप अपने खुदा की इबादत कर सको, पर आप पर उन्ही गणपति की ख़ुशी में उड़ाया गुलाल पड़ जाए तो आपका धर्म भृष्ट हो जाता हैं आप मारने काटने पर उतर आते हो।
चलिए मान लेती हूँ ये लोग असामाजिक तत्व हैं पर आप तो समझदार हैं क्यों नहीं ऐसे लोगो का अपनी पूरी ताकत के साथ विरोध करते, मैं कभी कभी इस कदर परेशान हो जाती हूँ की मेरा एक मुस्लिम भाई हैं घण्टो से उससे इनबॉक्स में लड़ती हूँ जलील करतीहूँ उसके स्टेटस पर उसी का मजाक उड़ाती हूँ अच्छा नहीं लगता। कभी कभी तो इतनी शर्मसार हो जाती हूँ की सोचती हूँ की कर कोई रहा हैं और ज्यादती मैं इसके साथ कर रही हूँ। पर क्या करू मैं परेशान हो उठती हूँ असुरक्षित महसूस करने लगती हूँ।
प्लीज अब बर्दाश्त नहीं होता भगवान के लिए यह माहौल बदल दीजिये, हत्याओ में धर्म मत देखिये हर हत्या का विरोध करिये, हर हत्यारे को बगैर धर्म देखे उसके अंजाम तक पहुँचाइये, और चलिए शुरुआत हम मरहूम अख़लाक़ के हत्यारे से ही करते हैं पर यह सिलसिला बना रहना चाहिए और अगर किसी हिन्दू की हत्या हो तो उसके हत्यारे का भी अंजाम वही हो जो अख़लाक़ के हत्यारो का होगा। वरना आप मुझे खो देंगे एक इंसान जो आपके पाले में बड़ी मजबूती के साथ खड़ी थी और मेरे जैसे ना जाने कितने और भी। विनती करती हूँ प्लीज हमारे जैसे लोगो को को इस आग से बचा लीजिये!!
लेकिन मैं आपके सामने एक दूसरा पहलु भी रखना चाहती हूँ की जो मेरे जैसे लोगो को ना चाहते हुए भी कट्टरता की तरफ धकेल रहे हैं जो हमारे स्वभाव में ही नहीं हैं। आपके रवैये से हम बेहद दुखी और असुरक्षित महसूस करते हैं और हमे मजबूरन ऐसी घटनाओ पर चुप्पी साधनी पड़ती हैं और आपको बता दूँ की यह चुप्पी हमारी पहली स्टेज हैं। दूसरी स्टेज पक्ष में बोलना और तीसरी स्टेज खुद वैसा ही हो जाना होता हैं। आपसे मार्मिक अपील करती हूँ की हमे इस कट्टरवाद के रास्ते पर चलने से बचा लीजिये यह आपका एहसान हम पर, इंसानियत और सेक्युलरिज्म पर होगा। आपके रवैये से कभी-कभी इतना कड़वापन मन में भर जाता हैं की मैं परेशान और बेचैन हो उठती हूँ।
दुःख इस बात का होता हैं की जब ऐसी घटनाओ के शिकार हिन्दू होते हैं तब आप सेकुलर लोग चुप्पी साध लेते हैं यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा हैं। मुझे याद हैं नागपुर में मोईन खान की हत्या, दादरी के अख़लाक़ की हत्या तो मैं पुरे जीवन ही नहीं भूल पाऊँगी, लेकिन मुझे सिर्फ दो दिन पहले पता चला की एक हिन्दू को सिर्फ इसलिए मार दिया गया की उसने एक धार्मिक स्थल के पास हार्न बजाया, एक लड़के को सिर्फ इसलिए मार दिया गया की वो किसी मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था। केरल से भी लगातार खबरे आती हैं नृशंस हत्याओ की तब आप लोग इसका विरोध क्यों नहीं करते? क्यों नहीं ऐसी खबरे मिडिया की कवरेज पाती हैं? बस ऐसी ही बाते मन में असुरक्षा पैदा करती हैं और आप जैसो की इंसानियत कटघरे में खड़ी करती हैं क्यों आप लोग ऐसी हत्याओ में मरने वाले का धर्म देखकर अपने आँसू बहाते हैं। क्यों नहीं आप लोग ऐसे लोगो को तब लताड़ते हैं? अरे मेरे यहाँ तो नास्तिक लोगो को भी स्वीकार किया जाता हैं, पर आप काफिर की हत्या के लिए उकसाते हैं। हम कैसे खुद को सुरक्षित महसूस करे ऐसे माहौल में?
हिन्दुओ की आस्था गाय से जुडी हैं तो प्लीज छोड़ दीजिये ना, मांस खाने के लिए बहुत से पशु पक्षी हैं खाइये कौन रोक रहा हैं, अपने हिन्दू भाइयो के लिए छोड़ दीजिये।
हम तो आपके लिए अपने गणपति के पंडाल खाली कर देते हैं कि आप अपने खुदा की इबादत कर सको, पर आप पर उन्ही गणपति की ख़ुशी में उड़ाया गुलाल पड़ जाए तो आपका धर्म भृष्ट हो जाता हैं आप मारने काटने पर उतर आते हो।
चलिए मान लेती हूँ ये लोग असामाजिक तत्व हैं पर आप तो समझदार हैं क्यों नहीं ऐसे लोगो का अपनी पूरी ताकत के साथ विरोध करते, मैं कभी कभी इस कदर परेशान हो जाती हूँ की मेरा एक मुस्लिम भाई हैं घण्टो से उससे इनबॉक्स में लड़ती हूँ जलील करतीहूँ उसके स्टेटस पर उसी का मजाक उड़ाती हूँ अच्छा नहीं लगता। कभी कभी तो इतनी शर्मसार हो जाती हूँ की सोचती हूँ की कर कोई रहा हैं और ज्यादती मैं इसके साथ कर रही हूँ। पर क्या करू मैं परेशान हो उठती हूँ असुरक्षित महसूस करने लगती हूँ।
प्लीज अब बर्दाश्त नहीं होता भगवान के लिए यह माहौल बदल दीजिये, हत्याओ में धर्म मत देखिये हर हत्या का विरोध करिये, हर हत्यारे को बगैर धर्म देखे उसके अंजाम तक पहुँचाइये, और चलिए शुरुआत हम मरहूम अख़लाक़ के हत्यारे से ही करते हैं पर यह सिलसिला बना रहना चाहिए और अगर किसी हिन्दू की हत्या हो तो उसके हत्यारे का भी अंजाम वही हो जो अख़लाक़ के हत्यारो का होगा। वरना आप मुझे खो देंगे एक इंसान जो आपके पाले में बड़ी मजबूती के साथ खड़ी थी और मेरे जैसे ना जाने कितने और भी। विनती करती हूँ प्लीज हमारे जैसे लोगो को को इस आग से बचा लीजिये!!
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