असलियत से ज्यादा प्रजेंटेशन कैसा हैं यह ज्यादा मायने रखता हैं

दो महिलाए की ऑफिस में बातचीत

पहली महिला- "कल तो शाम को बहुत मजा आया, तुम सुनाओ तुम्हारी कैसी कल की शाम रही?"

दूसरी महिला- "बहुत बुरी, मेरे हसबैंड घर आते ही जल्दी से डिनर करके सो गए कोई बातचीत तक नहीं हुई और तुम्हारे साथ क्या रहा?"

पहली महिला- "ओह यार क्या बताऊ मेरे पति शाम को घर आते ही मुझे रोमांटिक डिनर के लिए होटल ले गए .....

और वहाँ से हम एक साथ टहलते, आपस में बाते करते हुए करीब एक घंटे में घर पहुँचे उसके बाद उन्होंने पुरे घर में मोमबत्तिया जलाकर पुरे घर को परीलोक की कहानियो जैसा बना दिया, वाव सचमुच ग्रेट यार मजा आ गया"

उसी समय उनके पति आपस में क्या बात कर रहे होते हैं!!

पहला आदमी- " और सुनाओ कल की शाम कैसी रही?"

दूसरा आदमी- बहुत अच्छी यार घर पहुँचते ही टेबल पर डिनर तैयार मिला बस खाया और गहरी नीद में सो गया पूरी थकान दूर हो गयी....

तुम अपना सुनाओ"

पहला आदमी- "मत पूछ भाई कल की शाम का तो सोच कर ही डर लगता हैं घर जाते ही पता चला की घर में लाइट नहीं हैं, क्योकि बिजली का बिल जमा करना भूल गया था और डिनर भी नहीं बना था मज़बूरी में पत्नी को लेकर होटल जाना पड़ा खाना खाने के लिए, खाना इतना महँगा था की वापसी के लिए टैक्सी का भी पैसा नहीं बचा इसलिए घर पैदल आना पड़ा.....

घर पर लाइट नहीं थी पुरे घर में मोमबत्ती जलानी पड़ी, बहुत बुरा रहा यार"

 मोरल- असलियत क्या थी उससे कही ज्यादा प्रजेंटेशन कैसा हैं यह ज्यादा मायने रखता हैं|

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