बिहार कौन जीत रहा हैं पता नहीं पर बिहार और यूपी अगर बीजेपी जीतती हैं तो यकीन रखियेगा सम्पूर्ण देश का भाग्योदय का सूर्य बिहार और यूपी से निकलेगा।
राज्यसभा में बहुत से बिल अटके पड़े हैं जिनसे हम विकास की नयी ऊंचाई छु सकते हैं पर बीजेपी के पास बहुमत नहीं हैं। एक बार राज्यसभा में बहुमत मिला तो पूरी दुनिया को हम अपने कदमो में झुका लेंगे। हमारी प्रतिभाये विदेश पलायित नहीं होगी वो हमारे लिए काम करेंगी ऐसा माहौल देश में तैयार होगा। चीन से ज्यादा प्रतिभा हमारे यहाँ मौजूद हैं बस हमे मौका नहीं मिल रहा हैं एक बार चीन जैसा ओद्योगिक माहौल यहाँ बन जाए तो हम भी चीनी सामानों की तरह भारतीय सामान से पूरा विश्व पाट सकते हैं। अब विश्व की अर्थव्यस्था ऐसी हैं कि हम बिना निर्यात के आगे बढ़ ही नही सकते, आयात कम हो निर्यात ज्यादा यही अच्छी इकोनॉमी हैं। गरीब तबके का भला भी इसी में मुमकीन हैं। आप लोगो में से जो किसान परिवार से हैं वो इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं कि बिना बाहरी आय के कृषि में कोई लाभ नहीं हैं यहाँ तक की खेती से परिवार का पेट तक नही भरा जा सकता, बाहरी कमाई खेती और परिवार दोनों को मदद करती हैं। बाहरी कमाई से वक्त पर खेती के लिए संसाधन जुटाए जा सकते हैं पर हमारे देश में रोजगार की बेहद कमी हैं और यह कमी हम इंड्रस्ट्री लगाकर पूरी कर सकते हैं। लगभग सारे विकसित देश इसी व्यवस्था से विकसित हुए हैं, जो अमीर हैं उन पर देश की गरीबी का कोई फर्क नहीं पड़ता उल्टा राजकोषीय घाटे से अकसर उन्हें फायदा ही पहुँचता हैं। चालु वित्त खाता ही देश में गरीबी और महंगाई का जिम्मेदार होता हैं, चालु वित्त खाते में जितना घाटा होगा उतना ही देश में आर्थिक आराजकता फैलेगी जो कई पाप साथ लेकर आती हैं।
मैं आपको आसान शब्दों में समझाती हूँ, आप पुरे विश्व को परिवार मान लीजिये, यह आप सभी को मालूम होगा परिवार चलाने के लिए हमे बाहर से पैसा कमाकर लाना होगा तभी बाबू जी की दवा, अम्मा की साड़ी, मुन्ने की फ़ीस की व्यवस्था हो पाएगी। बाहर से पैसा नहीं आएगा और हम अपनी बचत से सिर्फ बाहर का सामान खरीदते रहे तो एक दिन हमारी बचत खत्म और साथ में हम भी खत्म हो जायेगे। इसी तरह देश की अर्थव्यवस्था चलती हैं विदेशी सामान हम बहुत ज्यादा आयात कर रहे हैं और बदले में हमारा निर्यात बेहद कम हैं, अगर निर्यात बढ़ेगा तो पैसा आएगा, पैसा आएगा तो घर में टीवी आएगी फ्रिज आएगा कार आएगी देश में सड़के बनेगी हर घर बिजली पहुंचेगी, बेहतरीन अस्पताल, उच्च शिक्षा संसथान आदि खुलेंगे हमारी क्रय शक्ति बढ़ेगी तो जाहिर हैं हम विकसित होंगे और हमारे साथ देश भी।
पुरानी सरकारें गरीबी हटाओ का नारा जरूर देती रही पर उन्होंने इसको जड़ से मिटाने की अपेक्षा एलोपैथ का सहारा ले मर्ज को दबाया, सब्सिडी के नाम पर भीख बाँट जनता को नकारा किया। दो रूपये किलो चावल गेंहू दे जनता को मुफ्तखोरी की आदत लगाई। ताकि लोग नकारा बने कामचोर बने और गरीबी की समस्या ज्यो की त्यों बनी रहे और साथ में उनका वोट बैंक भी, पर मोदी सरकार मजबूत आर्थिक सुधार के पक्ष में जिसे वो राज्यसभा में बहुमत होने और विपक्षी पार्टियो की गन्दी राजनीती के चलते लागू नहीं कर पा रही हैं।
आरक्षण का मुद्दा इस देश में इतना प्रासंगिक सिर्फ इसीलिए हैं की देश में रोजगार नहीं हैं, लोग सरकारी नौकरी के जरिये अपना भविष्य सुधारना चाहते हैं एक बार अच्छी प्राइवेट नौकरियों की देश में बाढ़ आ जाए तो आरक्षण को अप्रसांगिक बनते देर न लगेगी, पर वोटबैंक की राजनीती करने वाली पार्टिया यह चाहती ही नहीं क्योकि उन्हें मालूम हैं उनकी कुर्सी इसी आरक्षण के पाये पर टिकी हैं। मोदी जी इसीलिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करना चाहते हैं ताकि आरक्षण अप्रसांगिक हो जाए।
खैर देखते हैं कि भारत का भाग्य उदय होगा, या फिर विधाता का हमेशा की तरह हमारे साथ अन्याय!!
राज्यसभा में बहुत से बिल अटके पड़े हैं जिनसे हम विकास की नयी ऊंचाई छु सकते हैं पर बीजेपी के पास बहुमत नहीं हैं। एक बार राज्यसभा में बहुमत मिला तो पूरी दुनिया को हम अपने कदमो में झुका लेंगे। हमारी प्रतिभाये विदेश पलायित नहीं होगी वो हमारे लिए काम करेंगी ऐसा माहौल देश में तैयार होगा। चीन से ज्यादा प्रतिभा हमारे यहाँ मौजूद हैं बस हमे मौका नहीं मिल रहा हैं एक बार चीन जैसा ओद्योगिक माहौल यहाँ बन जाए तो हम भी चीनी सामानों की तरह भारतीय सामान से पूरा विश्व पाट सकते हैं। अब विश्व की अर्थव्यस्था ऐसी हैं कि हम बिना निर्यात के आगे बढ़ ही नही सकते, आयात कम हो निर्यात ज्यादा यही अच्छी इकोनॉमी हैं। गरीब तबके का भला भी इसी में मुमकीन हैं। आप लोगो में से जो किसान परिवार से हैं वो इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं कि बिना बाहरी आय के कृषि में कोई लाभ नहीं हैं यहाँ तक की खेती से परिवार का पेट तक नही भरा जा सकता, बाहरी कमाई खेती और परिवार दोनों को मदद करती हैं। बाहरी कमाई से वक्त पर खेती के लिए संसाधन जुटाए जा सकते हैं पर हमारे देश में रोजगार की बेहद कमी हैं और यह कमी हम इंड्रस्ट्री लगाकर पूरी कर सकते हैं। लगभग सारे विकसित देश इसी व्यवस्था से विकसित हुए हैं, जो अमीर हैं उन पर देश की गरीबी का कोई फर्क नहीं पड़ता उल्टा राजकोषीय घाटे से अकसर उन्हें फायदा ही पहुँचता हैं। चालु वित्त खाता ही देश में गरीबी और महंगाई का जिम्मेदार होता हैं, चालु वित्त खाते में जितना घाटा होगा उतना ही देश में आर्थिक आराजकता फैलेगी जो कई पाप साथ लेकर आती हैं।
मैं आपको आसान शब्दों में समझाती हूँ, आप पुरे विश्व को परिवार मान लीजिये, यह आप सभी को मालूम होगा परिवार चलाने के लिए हमे बाहर से पैसा कमाकर लाना होगा तभी बाबू जी की दवा, अम्मा की साड़ी, मुन्ने की फ़ीस की व्यवस्था हो पाएगी। बाहर से पैसा नहीं आएगा और हम अपनी बचत से सिर्फ बाहर का सामान खरीदते रहे तो एक दिन हमारी बचत खत्म और साथ में हम भी खत्म हो जायेगे। इसी तरह देश की अर्थव्यवस्था चलती हैं विदेशी सामान हम बहुत ज्यादा आयात कर रहे हैं और बदले में हमारा निर्यात बेहद कम हैं, अगर निर्यात बढ़ेगा तो पैसा आएगा, पैसा आएगा तो घर में टीवी आएगी फ्रिज आएगा कार आएगी देश में सड़के बनेगी हर घर बिजली पहुंचेगी, बेहतरीन अस्पताल, उच्च शिक्षा संसथान आदि खुलेंगे हमारी क्रय शक्ति बढ़ेगी तो जाहिर हैं हम विकसित होंगे और हमारे साथ देश भी।
पुरानी सरकारें गरीबी हटाओ का नारा जरूर देती रही पर उन्होंने इसको जड़ से मिटाने की अपेक्षा एलोपैथ का सहारा ले मर्ज को दबाया, सब्सिडी के नाम पर भीख बाँट जनता को नकारा किया। दो रूपये किलो चावल गेंहू दे जनता को मुफ्तखोरी की आदत लगाई। ताकि लोग नकारा बने कामचोर बने और गरीबी की समस्या ज्यो की त्यों बनी रहे और साथ में उनका वोट बैंक भी, पर मोदी सरकार मजबूत आर्थिक सुधार के पक्ष में जिसे वो राज्यसभा में बहुमत होने और विपक्षी पार्टियो की गन्दी राजनीती के चलते लागू नहीं कर पा रही हैं।
आरक्षण का मुद्दा इस देश में इतना प्रासंगिक सिर्फ इसीलिए हैं की देश में रोजगार नहीं हैं, लोग सरकारी नौकरी के जरिये अपना भविष्य सुधारना चाहते हैं एक बार अच्छी प्राइवेट नौकरियों की देश में बाढ़ आ जाए तो आरक्षण को अप्रसांगिक बनते देर न लगेगी, पर वोटबैंक की राजनीती करने वाली पार्टिया यह चाहती ही नहीं क्योकि उन्हें मालूम हैं उनकी कुर्सी इसी आरक्षण के पाये पर टिकी हैं। मोदी जी इसीलिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा करना चाहते हैं ताकि आरक्षण अप्रसांगिक हो जाए।
खैर देखते हैं कि भारत का भाग्य उदय होगा, या फिर विधाता का हमेशा की तरह हमारे साथ अन्याय!!
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7 comments: (+add yours?)
सीधी बात...साफ़ साफ़ समझ आने वाली
सीधी बात...साफ़ साफ़ समझ आने वाली
भारत का भाग्य उदय होगा
सचमुच इस लेख को ध्यान से दिल दिमाग लगाकर पढ़ ले मनन कर अनुसरण करे तो राष्ट्र प्रगति के पथ पर फर्राटे से दौड़ने लगेगा. पक्का है.
देश की जनता यदि इसे पढ़ ले तो सच्ची प्रगति के पर लग जाए। .
right
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