आपकी "जलन" ही हमारी ताकत हैं !!

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-देश की जीडीपी 7.4% पहुँच गयी!!

-घरेलू सामान की मंहगाई दर लगातार घट रही है !!

-35 सौ करोड़ का काला धन रिकवर कर लिया गया, मार्च तक 6500 करोड़ और आ रहा हैं, इस साल कुल तीस हजार करोड़ काला धन वापसी का लक्ष्य रखा गया हैं।

जनधन योजना के तहत देश में गरीबो को मुफ़्त बीमा और पांच हजार की OD की सुविधा भी प्रदान कर दी हैं, बदले में गरीबो ने देश का खजाना लबालब कर दिया हैं
मतलब सकारात्मकता और जमीनी विकास ने अपनी गति पकड़ ली हैं।

और उधर TOI-let पेपर ने PM के कोट का अधिक
मूल्य बताने पर माफ़ी भी मांग ली हैं।

पर आपका क्या? आपको तो मोदी जी के खिलाफ विषवमन से फुरसत नहीं, आपकी उनके प्रति अथाह नफरत और जलन हमे उनके और करीब लाती हैं, रोज सुबह उठने पर अपने खून में "भक्ति लेवल" बढ़ा हुआ पाती हूँ !!

समझिये, क्योकि इसी समझ में आपकी गति हैं !!

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ये कुछ उदाहरण हैं, इनमे छिपे सन्देश को गहराई से
समझने का प्रयास करियेगा।

1- गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार पिछले
वर्ष 266 मन्दिरो में चोरी की वारदाते हुई
लेकिन इलेक्ट्रानिक मिडिया की छोड़िये
प्रिंट मिडिया में भी कोई चर्चा नहीं!!

2- 266 किलोग्राम सोना स्वामी पद्मनाभ मन्दिर से गायब हैं, पर कही कोई चर्चा नहीं !!

मगर एक "कान्वेंट स्कूल" में एक चोर आता हैं CCTV
कैमरों की वायर कट करता हैं और 8 हजार रूपये चुराकर भाग जाता हैं।

इलेक्ट्रानिक मिडिया पर यह बड़ी खबर बनती हैं, घण्टों के प्रोग्राम बनाये जाते हैं इसे चर्च पर हमला करार दिया जाता हैं, धर्मनिरपेक्षता की दुहाई दी जाती हैं प्रधानमन्त्री से जवाब माँगा जाता हैं।

नवनिर्वाचित दिल्ली के मुख्यमन्त्री श्री केजरीवाल जी, यह मुद्दा शपथ ग्रहण समारोह में उठाते हैं।

और जब स्कूल के "फादर" ने यह बोला की यह कोई
रिलिजियस मसला नहीं, बल्कि सिर्फ चोरी का मामला हैं तो मिडिया "कान्वेंट" शब्द पर जोर देकर चोरी की वारदात कवर कर रही हैं।

समझिये की ये क्या सन्देश देना चाहते हैं,
क्योकि इसी "समझ" में आपकी गति हैं !!

सच्चा स्वराज

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मित्रो इस देश में सच्चा लोकतन्त्र और स्वराज उस दिन
लौट कर आएगा जब सरकार आपके पैदा किये 12 बच्चों को रोटी, कपड़ा, दवा और शिक्षा के
समुचित प्रबन्ध करते हुए उनके बालिग़ होने पर
किसी सरकारी दफ्तर में "पान खाकर थूकने"
की नौकरी देगी, और साल दर साल
पदोन्नति देते हुए वेतनमान
की वृद्धि करती रहेगी। इसके साथ ही सभी के
घरो में फ्री बिजली दो रूपये किलो का चावल
आटा अनवरत विपणन करती रहेगी। वृद्ध होने पर
सरकारी पेंशन, चिकित्सा खर्च
की जिम्मेदारी भी सरकारी तौर पर निर्वहन
हो।

मित्रो, हमे अब ऐसी ही सरकार चुननी हैं
जो उपरोक्त वर्णित स्वराज इस देश में लाने के
लिए प्रतिबद्ध हो, जयहिंद !!

स्वदेशी और FDI

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हम स्वदेशी की बात करते हैं, और नकारात्मक लोग पूछते हैं कि आपका मोबाइल, PC कहाँ का बना हैं और स्वदेशी की बात विदेशी साईट पर क्यों?

आप मुझे जवाब दीजिये की आजादी के इतनो वर्षो बाद हमने खुद का मोबाइल और लैपटॉप क्यों नहीं बनाया, क्यों नहीं किसी भारतीय ने फेसबुक जैसी साईट बनाई? आज अगर हमारे पास ऑप्शन होता तो हम उसे यूज़ करते, नहीं हैं और जरुरत की चीज हैं तो मजबूरी में ये विदेशी सामान हमें यूज़ करना पड़ रहा हैं |

और इतने अभाव के बावजूद आप हमारी हिम्मत तो देखिये, विदेशी मोबाइल विदेशी लैपटॉप और विदेशी साईट पर हम स्वदेशी का झंडा बुलंद कर रहे हैं लोगो को जाग्रत कर रहे हैं प्रेरित कर रहे हैं की लोग स्वदेशी का इस्तेमाल करे, और आप हमारी टांग खिंच रहे हैं, बताइए मुझे शर्म हमें या आपको आनी चाहिए!!

और स्वदेशी की बात करने वाले लोग जो रक्षा क्षेत्र में, और भारी तकनीकी वाले क्षेत्र में FDI का विरोध कर रहे हैं उन्हें चाइना के उद्योगिक विकास का इतिहास समझना होगा, चाइना ने ना तो मोबाइल की तकनिकी विकसित की और ना ही कोई कम्प्यूटर या सामरिक हथियार का आविष्कार किया, यहाँ तक की उन्होंने मोबाइल में पड़ने वाली मामूली मेमोरी चीप तक बनाने की कोई तकनिकी विकसित नहीं की, उन्होंने दुनिया भर की कम्पनियों और फैक्टरियों को अपने यहाँ प्लांट डालने के लिए आमंत्रित किया, उन्हें जमीन, बिजली और सस्ती लेबर उपलब्ध करवाया, इससे उनके यहाँ रोजगार बढ़ा (मगर मजदूरों के खराब आर्थिक हालत, और उनके शोषण से मैं सहमत नहीं हूँ) और उन्हें तकनिकी भी मिली और आज वो दुनिया का हर सामान खुद बनाते हैं, उनके इंजिनियर, मजदूरों ने विदेशी कम्पनियों की तकनीकी चुराई, और कुछ तकनीकि उन्हें समझौते के तहत मिली जिसका उन्हें बहुत लाभ हुआ और वो देखते देखते महाशक्ति बन गये |

और यही काम हमारे प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी करना चाहते हैं, क्योकि भारत की खराब आर्थिक स्थिति की वजह से हम R&D में ज्यादा खर्च नहीं कर सकते क्योकि अभी भी भारत की बहुसंख्यक जनता की मुलभुत आवश्यकता तक पूर्ववर्ती सरकारे नहीं पूरा कर पायी हैं और यह मोदी जी की दूरदर्शी योजना हैं|

हम सिर्फ रिटेल में FDI का विरोध कर रहे हैं, और उन क्षेत्रो में जहाँ हम आत्मनिर्भर हैं या बन सकते हैं और यह विरोध हमने कांग्रेस शासन में भी किया था और आगे किसी की सरकार रहेगी उसका भी करते रहेंगे, तकनीकी के क्षेत्र में FDI लाने का हमने कांग्रेस का भी विरोध नहीं किया था, परन्तु सुनने में आ रहा हैं की मिडिया में भी मोदी सरकार FDI लाना चाहती हैं जिसका हम पुरजोर विरोध करते हैं क्योकि मिडिया के क्षेत्र में FDI देश के लिए आत्मघाती फैसला होगा|

आखिर भारतीय उद्योगपतियों की गलती क्या हैं ?

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फिर से बकवास शुरू, जाहिल, आलसी, कामचोर,जलनखोरो की ..

कमीनो सिर्फ इतना बताओ की राबर्ट वाड्रा या मोदी जी गौतम अडानी से मिलते हैं तो क्या गलत करते हैं?

क्या गौतम अडानी आतंकवादी हैं ? या कोई अपराधी हैं वो?

अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर आज उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया हैं, बेहद गरीबी का दौर उन्होंने देखा. गरीबी की वजह से पढाई पूरी नहीं कर पाए मुबई में जाकर छोटी नौकरी की और अपनी मेहनत और क़ाबलियत से अपना बिजनेस खड़ा किया.

यह वही दौर था जब तुम लोग अपने बाप की कमाई पर ऐयाशी कर रहे थे, मजाक उड़ा रहे थे गौतम अडानी जैसे लडको का जिनके पास पहनने के लिए कपडा तक नहीं होता था.

कैसा माहौल देश का बनाया जा रहा हैं मिडिया द्वारा और निर्लज्ज कमअक्ल लोगो द्वारा, की देश के उद्योगपतियों के खिलाफ ऐसा विष-वमन, अब जो अम्बानी या अदानी से मिलेगा वो भ्रष्ट होगा ... मानसिक बिमारी हो गयी हैं.

साजिश हैं यह, गहरी साजिश .. देश के उद्योगपतियों का मनोबल तोडा जा रहा हैं, अब लोग किसी उद्योगपति से मिलने में डरेंगे, उद्योगपतियों के काम नहीं होंगे, जरा सोचिये वो कैसे अपना बिजनेस इस देश में कर पायेंगे जब देश का राजनैतिक वर्ग उनसे सिर्फ इसलिए नहीं मिलेगा की उनसे मिलने पर उनका वोट बैंक प्रभावित होगा.

और यह सब विदेशी पैसे पर इस देश में हो रहा हैं, क्योकि अम्बानी और अदानी जैसे उद्योगपतियों ने स्वदेशी तकनिकी से देश में उच्चकोटि का सामान बनाना शुरू कर दिया है. जिसका सीधा असर अमेरिका जैसे उत्पादक देश पर पड़ रहा हैं उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा रही हैं इसलिए वो बेहिसाब पैसे खर्च कर रहे हैं भारतीय मिडिया को खरीदने के लिए. नहीं तो भारतीय मिडिया यह बताये की अम्बानी और अदानी ने क्या गलत किया हैं?  क्यों उनसे मिलना अपराध बनाने पर तुली हैं यह बिकाऊ और दलाल मिडिया?

और मूर्खो की तरह खुद को राष्ट्रवादी कहने वाले लोगो ने अदानी और राबर्ट वाड्रा की फोटो शेयर करना शुरू कर दी? अरे यह प्रश्न क्यों नहीं पूछा जाता की गौतम अडानी पर क्या गंभीर आरोप हैं??

समझो इनकी चाल वरना मिट जाओ, देश बचाओ अपने देशभक्त व्यवसायी लोगो को बचावो और पूरी मजबूती के साथ अपने देश के उद्योगपतियों के साथ खड़े हो जाओ !!

मिसाल

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मुन्नावती कुमारी मिसाल हैं, उनके लिए जो गरीबी के नाम पर शिक्षा से दूर हो जाते हैं। मुन्नावती मजदूरी यानी रेजा का काम करती हैं, लेकिन उन्होंने पीजी संस्कृत में यूनिवर्सिटी टॉप किया है। सत्र 2010-12 में उन्होंने कुल 1600 अंक में से 1046 यानी 65.35 फीसदी अंक लेकर रांची यूनिवर्सिटी में टॉप किया और गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया। करीब एक सप्ताह पहले रांची विश्वविद्यालय ने विभिन्न विभागों के टॉपरों की घोषणा की है। उन्हें नवंबर में होने वाले 28वें दीक्षांत समारोह में मेडल दिया जाएगा।मुन्नावती ने बताया कि उनका सपना एमफिल की पढ़ाई कर लेक्चरर बनने का है। इस साल राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) दूंगी और पूरा भरोसा है कि इसमें सफल भी रहूंगी।उनका अब तक का पूरा सफर चुनौतीपूर्ण रहा है। जब मैट्रिक पास किया, तब तीन भाई बेरोजगार थे। मां देव कुंवर देवी किडनी की बीमारी से ग्रस्त। उनका इलाज रांची के करमटोली चौक स्थित डॉ. अशोक कुमार वैद्य से अब भी चल रहा है। घर का गुजारा जैसे-तैसे चल रहा था। इस बीच 2010 में पिता देवी दयाल साहू की मृत्यु हो गई। लेकिन, मुन्नावती ने कभी हिम्मत नहीं हारी। और अब उनकी मेहनत रंग लाई।

मोदी विरोधियो के दोहरे मापदंड ...!!

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जब कोई दो टके का लेखक जिसको कोई नहीं जानता वह कहता हैं कि "मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर देश छोड़ दूँगा"

या कोई अनर्थ-शास्त्री जिसने लोगो का जीवन स्तर उठाने के लिए कुछ ना किया हो सिर्फ किताबी ज्ञान से नोबल पुरस्कार पा गया हो वह लोगो को राय देते हुए फिरता हैं की "मोदी देश के प्रधानमन्त्री बनने की योग्यता नहीं रखते"

बुझी और बेरोजगार पूर्व फ़िल्मी अभिनेत्री जिनके चरित्र तक को भारत की आम जनता संदिग्ध नजरो से देखती हैं वो कहती हैं कि "मोदी की प्रधानमंत्री बनने से देश की छवि को धक्का लगेगा"

तब मोदी विरोधी खुश होकर उन्हें हीरो बनाने पर तुल जाते हैं और जगह जगह उनकी कही गयी बातो का लिंक चेपने लगते हैं ... और बोलते हैं उन्हें अपनी अभिवयक्ति की स्वतन्त्रता हैं

पर अगर कोई सेलेब्रेटी मोदी के पक्ष में बोलता हैं तो उसे ये खलनायक बनाने पर तुल जाते हैं कि उन्हें इस तरह के राजनैतिक विचार सार्वजानिक जीवन में नहीं देना चाहिए यहाँ तक की उस पर कीचड़ उछाल प्रतियोगिता सी चालु हो जाती हैं ...

आखिर ऐसा दोगलापन क्यों ??

की आप जो कहे वही सही हैं, बाकी लोग मुर्ख हैं उन्हें अपना नेता चुनने की तमीज नहीं हैं

अगर ऐसा हैं तो, अपनी घटिया सोच अपने पास रखिये हम मुट्ठी भर तमीजदार विरोधियो के बजाय उस "बदतमीज" जनसैलाब के साथ हैं जो मोदी का समर्थक हैं क्योकि आपके सेकुरिज्ल्म और वामपंथ में हम खुद को असुरक्षित, ठगा हुआ पाते हैं, और खुद को बेरोजगार पाते हैं|