सच तो ये हैं की इस देश में आप हिंदी, हिन्दू, स्वदेशी, और राष्ट्रभक्ति की बात नहीं कर सकते हैं अगर आप करते हुए पाए जाते हैं तो आप साम्प्रदायिक, दक्षिणपंथी, अतिपिछडे और पागल घोषित किये जा सकते हैं।
हाँ सेकुरिल्ज्म के नाम पर टोपी पहनकर इफ्तारी दावत खाते हुए आप अल्पसंख्यक समुदाय के आरक्षण, अंग्रेजी भाषा का महिमामंडन, मुंबई में बार बालाओं का डांस, लिवाइस की कमर से निचे की तरफ खिसकती जिन्स, हाथ में लेज़ के चिप्स के साथ पेप्सी गटकते हुए आतंकवादियों के मानवाधिकार की बात करते हैं तो आप सही मायने में प्रगतिशील और धर्म निरपेक्ष कहलाये जायेंगे।
और हाँ भूल कर भी अपने देश की तुलना चाइना जापान जिन्होंने लगभग हमारे देश के साथ विकास की दौड़ आरम्भ की थी चर्चा नहीं कर सकते क्योकि पुरे देश में जब "गुजरात का विकास माडल" नहीं लागू किया जा सकता तो चीन और जापान का कैसे लागू किया जा सकता हैं।
नोट- अगर किसी की भावनाए आहत होती हैं तो होती रहे वैसे भावनाए कुछ हमारी भी कम आहत नहीं हैं, अपने ही देश में बेगाने होने का दंश जो हम झेल रहे हैं शायद ही उस दर्द से बड़ा कोई दर्द हो।
हाँ सेकुरिल्ज्म के नाम पर टोपी पहनकर इफ्तारी दावत खाते हुए आप अल्पसंख्यक समुदाय के आरक्षण, अंग्रेजी भाषा का महिमामंडन, मुंबई में बार बालाओं का डांस, लिवाइस की कमर से निचे की तरफ खिसकती जिन्स, हाथ में लेज़ के चिप्स के साथ पेप्सी गटकते हुए आतंकवादियों के मानवाधिकार की बात करते हैं तो आप सही मायने में प्रगतिशील और धर्म निरपेक्ष कहलाये जायेंगे।
और हाँ भूल कर भी अपने देश की तुलना चाइना जापान जिन्होंने लगभग हमारे देश के साथ विकास की दौड़ आरम्भ की थी चर्चा नहीं कर सकते क्योकि पुरे देश में जब "गुजरात का विकास माडल" नहीं लागू किया जा सकता तो चीन और जापान का कैसे लागू किया जा सकता हैं।
नोट- अगर किसी की भावनाए आहत होती हैं तो होती रहे वैसे भावनाए कुछ हमारी भी कम आहत नहीं हैं, अपने ही देश में बेगाने होने का दंश जो हम झेल रहे हैं शायद ही उस दर्द से बड़ा कोई दर्द हो।
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